दर्द भरी कविता :- यादों के दम पर | Dard Bhari Kavita

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दर्द भरी कविता

दर्द भरी कविता
हम तो बस यादों के दम पर जिन्दगी जी जाएंगे ।
झेल कर लाखो सितम भी हम तुझे ही चाहेंगे ।।
तुम मेरी आराधना हो साधना हो वंदना,
तुम ही मेरे मन चमन के चंचरिक की कामना,
मृगशिरा सी जल रही मरू भूमि की हो प्रार्थना,
सावनी ऋतु अब तो आके सुन ले मेरी याचना,
भावना के भाव में हम धुन में तेरे गाएंगे ।
हम तो बस यादों के दम पर जिन्दगी जी जाएंगे ।।
तुम मिलो या ना मिलो हम ये भी तो नहीं जानते,
आके दिल की धड़कनों में प्यार को पहचानते,
हिचकियां हिम्मत  बढ़ाती हम तो ऐसा मानते,
नाम लेते काम बनते तो ना हम जग छानते,
मौन मन को उ न समझे तो किसे समझाएंगे ।
हम तो बस यादों के दम पर जिन्दगी जी जाएंगे ।।
जिन्दगी की दौड़ में हैं आंधियों से सामना,
हर समस्या के समंदर को है हमको लांघना,
दोष दूं मैं वक्त को या मन को दूं उलाहना,
राह ना दिखती हो जिसकी व्यर्थ क्यों फिर चाहना,
प्रेम का अमृत कलश क्या हम कभी पी पाएंगे ।
हम तो बस यादों के दम पर जिन्दगी जी जाएंगे ।।
पा के खोना खो के पाना बस यही एक ख्याल है,
फिर कभी खुद में खो जाना जिन्दगी का जाल है,
क्या सफलता क्या विफलता क्या भ्रमित जंजाल है,
इश्क़ की ऊंची उड़ानों में हम ठन ठन पाल है,
हो भला अंजाम जो भी भूल ना हम पाएंगे ।।
हम तो बस यादों के दम पर जिन्दगी जी जाएंगे ।।

रचनाकार  का परिचय

जितेंद्र कुमार यादव

नाम – जितेंद्र कुमार यादव

प्यार का इजहार कविताधाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश

स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई
शिक्षा – स्नातक

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