Category: ग़ज़लों की दुनिया

ग़ज़ल तर्क वितर्क | Ghazal Tark Vitark

3+ ग़ज़ल तर्क वितर्क मुश्क़िलों को समझें तर्क – वितर्क करें , मज़हबों में नहीं सोच में फ़र्क़ करें। कोहिनूर भी किसी ने चुरा लिया था , कमाई दौलत …

ग़ज़ल जहां को बता दूँ | Ghazal Jahan Ko Bata Du

0 ग़ज़ल जहां को बता दूँ तेरे हिज्र में ख़ुद को ऐसी सज़ा दूँ मोहब्बत है क्या ये जहां को बता दूँ गुज़र पाएगी कैसे तन्हा जवानी किसी नाज़नीं …

ग़ज़ल अच्छा लगता है | Ghazal Achha Lagta Hai

0 ग़ज़ल अच्छा लगता है ख़त का आना,सबसे छुपाना, अच्छा लगता है। सोच के रखना नया ठिकाना, अच्छा लगता है। पहली टक्कर,ज़ोर का झगड़ा नहीं भूलता कुछ बार-बार क़िस्सा …

ग़ज़ल – भूलने में ज़माने लगे हैं | Ghazal Bhulane Mein Zamane Lage Hain

0 ग़ज़ल – भूलने में ज़माने लगे हैं रक़ीबों से निस्बत बढ़ाने लगे हैं दिलो-जान उन पर लुटाने लगे हैं वो फिर से पलटकर क्यूँ याद आए जिन्हें भूलने …

ग़ज़ल – बावरा मन | Ghazal Bawra Man

0 ग़ज़ल – बावरा मन पेड़ की फुनगी का तोता बावरा मन। उन्स में ईश्वर के रोता बावरा मन। ग़र्ज़ के गहरे समुंदर में नहाकर हर भरोसा अपना खोता …