ग़ज़ल – सरकार देख लो | अंशु विनोद गुप्ता जी की बेहतरीन ग़ज़ल

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आदरणीया अंशु विनोद गुप्ता जी की ग़ज़ल – सरकार देख लो :-

ग़ज़ल – सरकार देख लो

ग़ज़ल – सरकार देख लो

होठों पे चुप लगाए है सरकार देख लो।
चारों तरफ़ है आग की भरमार देख लो।

कुछ लोग छोड़ आए हैं फूलों की घाटियाँ,
केसर के बाग़ अब भी हैं गुलज़ार देख लो।

ज़ख़्मों के टाँके खुल गए पीड़ा उभर गई,
सम्भव नहीं है कोई भी उपचार देख लो।

सावन की बिजलियों ज़रा हौले से कौंधना
फ़ीकी पड़े न हुस्न की चमकार देख लो।

ख़त आपने हमेशा ही अरमान से लिखे
मैंने लिखे हैं ख़ून से दिलदार देख लो।

आज़ाद पंछियों की तरह थी ये ज़िन्दगी,
हम प्यार में हुए हैं गिरफ़्तार देख लो।

सुविधाएं हैं अमीर को फिर भी नहीं सुकूँ
निर्धन चलाए शांति से घर बार देख लो।

मौसम की मार खेत मकाँ को उजाड़ दे
कर्ज़ों के बोझ से दबा हलदार देख लो।

हैवान बन गया है ये इंसान इस क़दर
दर-दर पे हो रहा है बलात्कार देख लो।

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अंशु विनोद गुप्ता जी अंशु विनोद गुप्ता जी एक गृहणी हैं। बचपन से इन्हें लिखने का शौक है।नृत्य, संगीत चित्रकला और लेखन सहित इन्हें अनेक कलाओं में अभिरुचि है। ये हिंदी में परास्नातक हैं। ये एक जानी-मानी वरिष्ठ कवियित्री और शायरा भी हैं। इनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें “गीत पल्लवी “,दूसरी पुस्तक “गीतपल्लवी द्वितीय भाग एक” प्रमुख हैं। जिनमें इनकी लगभग 50 रचनाएँ हैं।

इतना ही नहीं ये निःस्वार्थ भावना से साहित्य की सेवा में लगी हुयी हैं। जिसके तहत ये निःशुल्क साहित्य का ज्ञान सबको बाँट रही हैं। इन्हें भारतीय साहित्य ही नहीं अपितु जापानी साहित्य का भी भरपूर ज्ञान है। जापानी विधायें हाइकु, ताँका, चोका और सेदोका में ये पारंगत हैं।

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