जीवनसाथी पर कविता :- जीवनसाथी के संग आसान | Jeevansathi Par Hindi Kavita

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जीवनसाथी पर कविता

जीवनसाथी पर कविता

पहली बार जब उसको देखा
दिल ने कहा चांद निकला।
देख के उसकी मोहक मुस्कान
ह्रदय का मेरे मौसम बदला।।

दुनिया मेरी थम सी गई
मन के बाग में फूल महका।
वीरान से मेरे जीवन में जैसे
गीत गाता कोई खग चहका।।

अंधेरी रात लगने लगी प्यारी
तारो से होने लगी मेरी बाते।
पतझड़ मौसम में पल भर में
अचानक होने लगी बरसाते।।

गर्मी की अति तीव्र पवन
तन को प्रतीत होती शीतल।
सूने से अधूरे जीवन का वह
आने वाला मेरा रोशन कल।।

एक रोज उससे हुआ मिलन
प्रेम को उसने किया स्वीकार।
बाते धीरे धीरे बड़ने लगी फिर
मशहूर होने लगा हमारा प्यार।।

पुरानी गालियां नई लगने लगी
अजीब सा जागा नया एहसास।
जीवन के एकांत समय में भी
रहता था वह सदैव दिल के पास।

रंग बिरंगी हुई बेरंग जिंदगी
मिला प्यार पहला अनमोल।
ईश्वर ने जैसे मेरे जीवन में
दिया कोई मधुर-संगीत घोल।।

आशा करता हूं इतनी सी बस
हंसते हंसते कट जाए सफ़र।
जीवनसाथी के संग आसान
हो जाती है हर मुश्किल डगर।।

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नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

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