प्रकृति प्रेम पर हिंदी कविता :- प्रकृति-प्रेम जगाना सीखो | Prakriti Prem Par Hindi Kavita

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कुदरत से प्यार करने का संदेश देती ( Prakriti Prem Par Kavita In Hindi ) प्रकृति प्रेम पर हिंदी कविता ” प्रकृति-प्रेम जगाना सीखो ” :-

प्रकृति प्रेम पर हिंदी कविता

प्रकृति प्रेम पर कविता

कभी बोकर देखो,एक बीज,अपने घर के आँगन में।
प्रकृति-प्रेम जगाना सीखो,अपने-अपने आचरण में।
आसान नहीं कोई अंकुर उगाना,बंजर किसी धरती पर
एक बीज ममता का बोओ,कभी जींवन के प्रांगण में।

ग्रीष्म,वर्षा,शरद, हेमंत, हो या हो शिशिर सी ऋतुऐं।
पतझड़,सावन का मौसम हो या फिर बसंत के झूले।
हर मौसम में उगते धरती में हर किस्म के अंकुर नए।
जो मन हो वह बीज पर,अवश्य बीज वसुधा में बोएं।

रोपकर एक बीज नया,पोषित करें ममता के जल से।
मन प्रफुल्लित होगा जब, अंकुर उगेगा भू आंचल से।
कुछ छतरियां,नवजात शिशु सी,मुट्ठी भींचे मचल उठेंगी।
सीना ताने गर्वित होकर,ये डालियां,फौज सी खड़ी रहेंगी।

विजय पताका लिए हाथ हों,फसलें हवा से टकरायेंगी।
पंख लगाकर तुम्हें ये अंकुर, उड़ने को आतुर मिलेंगी।
नन्ही-नन्ही,कोंपल का जैसे,नभ से बात करने का मन हो
देखो गौर से कभी इन्हें,ये अंकुर मंद-मंद मुश्कान भरेंगी।

कुछ को बाड़े का सहारा, तो कुछ जमीन में फैलेंगी।
कुछ सीना ताने कदम मिलाकर, वर्षा आंधी झेलेंगी।
हरी-भरी छटा बिखेर कर,यह अपना जादू दिखलाए
इत्र की शीशी से सुगंध को, जैसे परिवेश में उढेलेंगी।

समयानुसार स्वरूप बदले,कुछ डालियां,कुछ बेल बनेंगी।
फिर डालियों में बालियाँ और बेल में फलियाँ खनकेंगी।
रंग परिवर्तित करने लगे तो सोचना परिपक्व हो गयी,
नागमणि सी चमक लेकर,फलियाँ,डालियों में जब लदेंगी।

लोभ इक जागेगा मन में,कि अभी इन्हें खाने का मन हो।
कुछ कच्ची,कुछ पकाकर,कौन विधि,खाने का चयन हो।
मुख से पहले,नयनों से चख,फिर कहीं जिव्या द्रवित हो।
तोड़ सारी फसलों को फिर,कुछ भविष्य हित संचयन हो।

करते हैं आज प्रण कि,हर मौसम में बीज बोते रहेंगे,
ममता के जल से सींचकर,कुछ हम भी अंकुर उगाएंगे।
खुशियों से लहलहाए फसल और बेलें भी बलखाएँ
अन्न वर्षा करके धरा पर, स्वजींवन पावन कर जाएंगे।

शीश झुकाकर,आशीष मांग, धरती माँ को नमन करेंगे।
धन्य हो तुम धरती माँ,तुम्हें सदैव ही हम शुक्रिया कहेंगे।
तुम सदैव हमको बस देती हो,बदले में कुछ न लेती हो।
माँ मरके भी हम सब कभी, तेरा ये कर्ज न चुका सकेंगे।

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मेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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