Tag: हरीश चमोली

गांव पर हिंदी कविता :- यूँ ही गाँव, गाँव नहीं कहलाता | Gaon Par Hindi Kavita

1+ गांव पर हिंदी कविता यूँ ही गाँव, गाँव नहीं कहलाता साहब, कई पीढ़ियाँ बितानी पड़ती हैं गाँव में। यूँ ही आटा-चावल नहीं बनती बालियाँ चलकर फोड़ने पड़ते है …

माँ बिन कैसे जी पाऊंगा :- माँ की याद में कविता | Maa Bin Kaise Jee Paunga

1+ आप पढ़ रहे हैं माँ की याद में कविता ( Maa Bin Kaise Jee Paunga ) ” माँ बिन कैसे जी पाऊंगा ” :- माँ बिन कैसे जी …

कुर्सी पर कविता :- ओ प्यारी कुर्सी | Kursi Par Kavita

1+ कुर्सी तो लगभग हर घर में होती है और आप सभी उसे देखते भी होंगे। लेकिन एक कवि उस किस तरह से देखता है आइये जानते हैं हरीश …

माँ का दर्द कविता :- जलती आग की लौ है माँ | Maa Ka Dard Kavita

1+ माँ अपने जीवन में बहुत कष्ट सहती है जिस से कि उसका परिवार सुखी रह सके कैसे? पढ़िए हरीश चामोली जी द्वारा रचित ( Maa Ka Dard Kavita …

माँ की महिमा कविता :- माँ लाकर इस दुनिया में | Maa Ki Mahima Kavita

1+ मनुष्य को जन्म देने वाली माँ जन्म के पहले से लेकर बच्चे के बड़े होने तक बहुत कष्ट सहती है। माँ के त्याग और बलिदान को समर्पित ( …