Tag: सूरज कुरैचया

कविता पर्यावरण पर :- वृक्ष काटने से कहीं खो गया | Kavita Paryavaran Par

0 कविता पर्यावरण पर वसुधा का वह सुनहरा दृश्य न जाने कहां लुप्त हो गया। प्रकृति का मोहक सा नजारा वृक्ष काटने से कहीं खो गया।। सूखे हुए पेड़ों …

ऋतुओं पर कविता :- नियम समय का है बदलाव | Rituon Par Hindi Kavita

1+ ऋतुओं पर कविता जीवन का हर एक क्षण नहीं होता है एक समान। कभी होता है हरा भरा कभी होता है रेगिस्तान।। प्रकृति भी अपने मौसम समय के …

पढ़ाई पर बाल कविता :- मुझको कागज कलम भायी | Padhai Par Bal Kavita

1+ पढ़ाई पर बाल कविता देखो मां घर के बाहर आया है कोई खिलौने वाला। पास है उसके तीर धनुष और रंगीन मोतियों की माला।। डमरू डम डम बजने …

कोरोना पर हिंदी में कविता :- प्रकृति में मचाया है हाहाकार | Hindi Me Kavita Corona Par

1+ कोरोना पर हिंदी में कविता कोरोना ने मानव जीवन और प्रकृति में मचाया है हाहाकार। समय की मांग के कारण सबने घर में रहना किया है स्वीकार।। हंसता …

ईमानदारी पर कविता :- नहीं छोड़ना तुम ईमानदारी | Imandari Par Kavita

1+ ईमानदारी पर कविता जीवन की विपरीत घड़ी में नहीं छोड़ना तुम ईमानदारी। वसुधा को स्वर्ग बनाने की है हम सभी की जिम्मेदारी।। जीवन में जिस मानव ने ईमानदारी …

पिता को समर्पित कविता :- शिक्षित किए मुझे मेरे तात। Pita Ko Samarpit Kavita

1+ पिता को समर्पित कविता कंधों पर अपने मुझे बिठाकर अंजान जगत से मुझे मिलाया। मेरी मूक बातों को समझकर उर में मेरे प्रेम का पुष्प खिलाया।। अपनी इच्छाओं …