ग़ज़ल बिछड़ने का इशारा करके और उलझन में डाल कर | Hindi Ghazal

आप पढ़ रहे हैं ग़ज़ल बिछड़ने का इशारा करके :-

ग़ज़ल बिछड़ने का इशारा करके

ग़ज़ल बिछड़ने का इशारा

वो डराती है बिछड़ने का इशारा करके
क्या गलत मैंने किया प्यार ज़ियादा करके

तेरी यादों में जला उम्र तलक सूरज सा
और फिर डूब गया जग में उजाला करके

यूँ नही मुझको फ़क़त इश्क़ में आँसू ही मिलें
मैं कभी ख़ुश भी हुआ ख़ुद को तुम्हारा करके

मेरे बिन काटना इक पल भी बड़ा मुश्किल था
और फिर उम्र कटी मुझसे किनारा करके

पहले ही इश्क़ में ख़ुद को मैं गँवा आया हूँ
क्या मैं दे पाऊँगा फिर इश्क़ दुबारा करके


उलझन में डाल कर

उलझन से बच रहा है वो उलझन में डाल कर
हमको लगा था देगा कोई हल निकाल कर

नफ़रत की आग में जो ये जज़्बात मर गये
प्यासों को देगी क्यूँ ये ज़मीं जल निकाल कर

तेरी तलब में जैसे फिरा मैं गली गली
तू भी हमारे इश्क़ में खुद का ये हाल कर

क़िस्मत पे वो ही लोग उठाते है उंगलियां
रखतें है अपने काम जो सब कल पे टाल कर

मैं इसलिये भी इश्क़ से परहेज़ कर रहा
रखता नही है कोई भी दिल देखभाल कर

पढ़िए :- हिंदी ग़ज़ल प्यार की इबादत | Hindi Ghazal Pyar Ki Ibadat


रचनाकार का परिचय

ओम अवस्थी

यह ग़ज़लें हमें भेजी हैं ओम अवस्थी जी ने रेवा, मध्य प्रदेश से।

‘ ग़ज़ल रास्ते निकलते हैं और झगड़ा नहीं किया ‘ के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

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