Janmashtami par kavita – कृष्ण जन्माष्टमी पर कवितायें

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Janmashtami par kavita-
प्रिय पाठकों आप सभी के लिए आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष में छोटी कवितायेँ अमिता दुबे जी के शब्दों में –

Janmashtami par kavita – श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर छोटी कवितायें

Janmashtami par kavita

1 .
श्याम मनोहर बंशीधर।
मुरलीवाले प्रभु गिरधर।

मनमोहन हो है नटनागर।
बृजमोहन भी हो गिरिवर।।

बाँसुरी अंतस छुए है अधर।
जिसमे राधे राधे का ही स्वर।।

गोपाल कृष्ण प्रभु करुणाकर।
यह जगत तुम्हारा ही श्रीधर।।

मन प्राण बसो जीवन भर।
मोह ताप हरो हे हरिहर।।

नारायण बनते कभी लक्षमी धर।
पाप हरो मेरे शीश धरो अपना कर।।

मीरा के गिरधारी तुम सुन्दर।
यशोमती लाल लगे ना नजर।।

भजूँ मन कर्म वचन जीवन भर।
पाऊँ नेह सदैव मन मे सुखकर।।


2.
तिथि अष्टमी नक्षत्र रोहणी,
जन्म लिए है कृष्ण कन्हैया।
आठवें पुत्र बनकर आये
प्रमुदित देवकी मैय्या।।

मथुरा गोकुल वृंदावन घूमे,
कहलाये द्वारिका धीश
सुदामा के परम मित्र बने,
द्रोपदी के भ्राता बन गए ईश।।

लीलाधर की लीला बड़ी,
सारथी तुम्ही खेवैय्या।।
तिथि अष्टमी नक्षत्र रोहणी,
जन्म लिए है कृष्ण कन्हैया।

राधा के हो श्याम ,
मीरा के गिरधारी  हो
करुणा के तुम सागर,
सबके पालनहारी हो ।।

कृष्ण जनमोत्सव की सारे,
जग को लाखों बधाईयाँ।
तिथि अष्टमी नक्षत्र रोहणी,
जन्म लिए है कृष्ण कन्हैया।

मात पिता को मुक्त कराये,
कंश को मार गिराए।
उग्रसेन को सम्मानित कर,
हो इंद्र को हराये।।

द्वापरयुग के अवतारी ,
बाल ग्वाल चरैय्या।।
तिथि अष्टमी नक्षत्र रोहणी,
जन्म लिए है कृष्ण कन्हैया।


3.
मन पनघट हो जाता है।
घट-घट मन हो जाता है।

जग पावन बन जाता है।
जब ह्र्दयभाव समाता है।

मोहे गोकुल गाँव बुलाता है।
मन मथुरा धाम पहुंचाता है।

यमुना की धारा बहती है
लीलाधर रास रचाता है।।

तन मन चरण शरण होकर
जीवन वृंदावन बन जाता है।।


4.
यशोमती की गोद में, बैठे सुंदर श्याम।
आँख बंद कर पा लिए, मातु छाँव सुख धाम।।
मात छाँव सुख धाम,जगत का भरते प्याला।
सुख कर्ता देखा करें, कहाँ प्रेम का हाला।।

सुमति कुमति का भान, देते सदा है सदगति।
लेकर संसार को , बैठी हुईं यशोमती।।


5.
नील पीताम्बरी देख,
नीर सरोज नयन
नीलाम्बर छटा के
नाद बाँसुरी देख।

नित नवल विवेक
नटखट नवरूप
नयनकमल भर,
नीर भाव अनेक।

नमन विदेह एक
नेह धार बरसाए।
नभमंडल मुखर,
नाम ही है प्रत्येक।

नमो नमो नमन
नागनाथेश्वर मेरा
नाशवान यह देह।
नित्य समा श्रध्देय।।


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नाम -अमिता रवि दुबे
पति का नाम -रवि दुबे
शिक्षा- एम ए हिंदी 2 एमए समाजशास्त्र साहित्य रत्न
रुझान रचात्मक- लेखन संचालन, अभिनय वक्ता
विधा- गद्य पद्य दोनों, हिंदी छत्तीसगढी
आकाशवाणी रायपुर जगदलपुर दूरदर्शन से प्रसारण
प्रसारण देश अनेक पत्रपत्रिकाओं में
संस्थागत प्रकाशन-कार्यक्षेत्र समाज सेवा शिक्षा बाल पत्रकारिता पर्यायवरण आदि

सम्मान पुरस्कार- 1978 आकाशवाणी युवा कलाकार सम्मान
क्रमशः सर्वश्रेष्ठ छात्रा सम्मान महाविद्यालय एवम पुरस्कार
महादेवी सम्मान
अखिल भारतीय मीनी माता सम्मान
लेखन सम्मान
रचनाकार सम्मान
सृजन सम्मान
अभव्यक्ति सम्मान
साहितयभूषन सम्मान
पुनः महादेवी सम्मान
देश भर की संस्थाओं से समय समय पर प्रोत्साहन , सम्मान पुरस्कार
बाल पत्र-कारिता के लिये प्रादेशिक सम्मान पुरस्कार
महाविद्यालय में हिंदी अध्यापन स्नात्तकोत्तर तक सेवा
वर्तमान में रुचि नुसार समय समय पर जनहितार्थ कार्यक्रम में संलग्न

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