प्रेम कविता- कविता क्या है ? और दिल मेरा कांच सा

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प्रेम कविता- कविता क्या है ? और दिल मेरा कांच सा- 

प्रिय पाठकों आज आप सबके लिए दो प्रेम कवितायें  प्रस्तुत हैं 1- कविता क्या है ? 2- दिल मेरा कांच सा, तो आइये पढ़ते हैं कवि अनमोल रतन जी की रचनाएं –

प्रेम कविता- कविता क्या है ? और दिल मेरा कांच सा

प्रेम कविता- कविता क्या है ? और दिल मेरा कांच सा

1.
कविता क्या ? हैं..

कविता नैंनो का काजल हैं।
कविता निर्मल गंगाजल हैं।।

कविता में दर्द तुम्हारा हैं
कविता में दर्द हमारा हैं
ढूंढोगें अगर तो पाओगे
इस में भूमण्डल सारा हैं
ज़िसे ओंढ़ कर सो ज़ाते हो
चैन से तुम हर रातों को ,
कविता उस माँ का आँचल हैं।
कविता निर्मल गंगाजल हैं।।

कविता में प्रेंम समाहित हैं
कविता जन जन का हित हैं
कविता अनुराग भरी उतरी
कविता हर जगह खरी उतरी
कविता ही सच की सवारी हैं
ये कविता तो जान हमारी हैं
ज़िसको सुन कर हो जाता हैं
जीवन का हरपल आनन्दित,
कविता वो राधा की पायल हैं।
कविता निर्मल गंगाजल हैं।।

कविता व्रंदा का आंगन हैं
कविता प्रियसी का सावन हैं
कविता का एक एक हर्फ ज़रा
देखो तो कितना मनभावन हैं
जो नित कहते कविता क्या हैं
उन्हे दिखा दो ग्रंथ पुराणो में,
कविता हर प्रशनो का हल हैं।
कविता निर्मल गंगाजल हैं।।

कविता नैंनो का काजल हैं।
कविता निर्मल गंगाजल हैं।।

2.

दिल मेरा काँच सा
प्रेम कविता - मधुर स्मृति (हिंदी प्रेम कविता )

दिल मेरा काँच सा इसको मत तोड़ना।
चाहे हो जाये जो मुझको मत छोड़ना।।

नाम तेरे लिख दी हमने
अपनी सारी ज़िन्दगानी
मैने दिल से है लगा रखा
अब तक हर इक तेरी निशानी
तुम्हारा हर नाज़ नखरा मैं उठाऊंगा गर,
अरमां से भरा जो कासा उसे मत फोड़ना।
दिल मेरा काँच सा इसको मत तोड़ना।

तुम्हे हर ख़ुशी दिलाऊँ
ये वादा है मेरा दिलवर
नैनो को क्या हुआ जो
कभी सोये नही जी भर
मेरे नवजवान लोगो तुम्हे मशवरा है मेरा,
दिए खत कभी जो तुमको उसे मत मोड़ना।
दिल मेरा काँच सा इसको मत तोड़ना।

हाँ चाहो तो जान ले लो
गर नराज़ तुम न होना
जो कानो तलक न आये
वो आवाज तुम न होना
कितनी भी मुश्किले हो जाये चाहे जो भी,
पर नफ़रतों की चादर कभी मत ओढ़ना।
दिल मेरा काँच सा इसको मत तोड़ना।

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रचनाकार का परिचय –
नाम- अनमोल रतन (श्रृंगार रस कवि)
पता – रायबरेली, उत्तर प्रदेश

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