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सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"

कोटा, राजस्थान के रहने वाले सुरेश चन्द्र "सर्वहारा" जी स्वैच्छिक सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी (रेलवे) हैं। सुरेश जी एक वरिष्ठ कवि और लेखक हैं। ये संस्कृत और हिंदी में परास्नातक हैं। इनकी कई काव्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें नागफनी, मन फिर हुआ उदास, मिट्टी से कटे लोग आदि प्रमुख हैं। इन्होंने बच्चों के लिए भी साहित्य में बहुत योगदान दिया है और बाल गीत सुधा, बाल गीत सुमन, बच्चों का महके बचपन आदि पुस्तकें भी लिखी हैं।

सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"

पद्य कथा दो ठग :- बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कविता | Shikshaprad Padya Katha Do Thug

अपना गाँव कविता

0 पद्य कथा दो ठग एक लोककथा का पद्य रूपांतरण है इस कथा में दो ठग एक दूसरे को ठगने के फेर में खुद ही ठगी के शिकार हो जाते हैं। इस पद्य कथा में बच्चों को कहानी के माध्यम से एक दूसरे के साथ छल नहीं करने की शिक्षा दी गई है पद्य कथा …

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हिंदी कविता वफादार मनकू | ब्राह्मणी और नेवला पंचतंत्र पद्य कथा

हिंदी कविता वफादार मनकू

0 पंचतंत्र की कहानी ब्राह्मणी और नेवला की कविता रूप में प्रस्तुति हिंदी कविता वफादार मनकू में :- हिंदी कविता वफादार मनकू बहुत समय पहले रहता था एक गाँव में पंडित, राजसभा में अपने गुण से था वह महिमा – मंडित। १। गुजर रहा था एक बार वह जब जंगल से होकर, बैठ गया था …

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शिक्षाप्रद हिंदी बाल कविता | Moral Poem In Hindi

शिक्षाप्रद हिंदी बाल कविता

+1 शिक्षाप्रद हिंदी बाल कविता :- हमें धोखा देने वाले अपने ही होते हैं क्योंकि गैरों को हमारी कमजोरी का पता नहीं होता। इसलिए जीवन में सभी से सतर्क रहना चाहिए। लेकिन एक चीज जो उससे भी जरूरी है वह यह कि हम पर भले ही कितनी मुसीबत आये हमें कभी भी सहायता के लिए …

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