Tag: डा. गुरमीत सिंह

अध्यापक पर कविता :- गुमराह समाज | Adhyapak Par Kavita

0 अध्यापक पर कविता समाज भूल गया आज रास्ता, मंजिल कहीं और है, चला कहीं और जाता है, कारण भी स्पष्ट है कि अध्यापक की कद्र करना इसे कदापि …

शिक्षक पर हास्य कविता :- आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर तंज कसता बेहतरीन व्यंग्य

1+ शिक्षक पर हास्य कविता ( Shikshak Par Hasya Kavita ) :- कहते हैं अध्यापक समाज का भाग्यविधाता होता है। समाज के विकास में योगदान देने वाले महापुरुषों के …

हास्य व्यंग्य कविता लक्ष्मी और सरस्वती | Hasya Vyangya Kavita Laxmi Aur Saraswati

2+ पढ़िए कवि और चोर की नोकझोंक वाली हास्य व्यंग्य कविता लक्ष्मी और सरस्वती ( Hasya Vyangya Kavita Laxmi Aur Saraswati ) :- हास्य व्यंग्य कविता लक्ष्मी और सरस्वती …

धूप की आत्मकथा कविता :- मैं धूप हूँ | Dhoop Ki Atmkatha kavita

0 धूप की आत्मकथा कविता मैं धूप हूँ, अक्सर परछाईं से डर जाता हूँ, फिर भी परछाइयों के संग गुजर जाता हूँ। क्या होता है कहाँ, सब खबर है …

हास्य कविता : लाइब्रेरी और राजनीति | Hasya Kavita Library Aur Rajneeti

1+ हास्य कविता : लाइब्रेरी और राजनीति अखबार में पढ़ा कि बंदरों ने किताबें फाड़ दी एक लाइब्रेरी में, समझ नहीं पाया, ये काम सही समय पर हुआ या …