श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति
माँ पार्वती के शक्तिशाली तांडव स्वरूप की स्तुति, जो शत्रुओं का नाश और भक्तों को अभय प्रदान करने वाली है।
माँ पार्वती के शक्तिशाली तांडव स्वरूप की स्तुति, जो शत्रुओं का नाश और भक्तों को अभय प्रदान करने वाली है।
हँसी पर दोहे - हँसी केवल चेहरे की मुस्कान नहीं, बल्कि आत्मा की वह मधुर ध्वनि है जो जीवन के हर अंधकार को उजाले में बदल देती है। कभी शिशु की किलकारी बनकर, कभी प्रेम की मूक भाषा बनकर, तो कभी हास्य की मुक्त धारा बनकर हँसी मनुष्य के जीवन…
"यादों का ज़हर" वफ़ा, बेवफाई और रूहानी दर्द की एक ऐसी दास्तां है, जो सीधे दिल पर दस्तक देती है। यह कविता उन प्रेमियों की आवाज़ है जिन्होंने मोहब्बत में सिर्फ आँसू और तन्हाई को ही अपना इनाम पाया है। जहाँ एक ओर कवि खुद को मिटाकर शांति (सुकून) पा…
“तेज़ी से बदलती आधुनिक जीवनशैली ने मनुष्य को सुविधा तो दी, पर साथ ही छीन लिए उसके स्वाभाविक व्यायाम, शारीरिक अनुशासन, और पारंपरिक जीवन मूल्य। आज की यह रचना स्वास्थ्य पर दोहे—आलस्य, गलत आदतों और अंधाधुंध आधुनिकरण के कारण उभरते रोगों को उजागर करती है। यह दोहे केवल शब्द नहीं,…
आदि से अनंत तक, सृष्टि से संहार तक जो स्वयं समय के भी स्वामी हैं, जो शून्य में स्थित होकर भी संपूर्ण ब्रह्मांड को धारण करते हैं, जिनकी जटाओं से बहती गंगाजल की धारा, और जिनके डमरू से उत्पन्न हुआ प्रथम नाद। आज प्रस्तुत है—महादेव की महिमा को समर्पित एक…
“इस पवित्र धरा की अनंत महिमा, उसके असीम गौरव और हमारी आत्मा में बसती मातृभूमि के प्रति श्रद्धा को समर्पित आज प्रस्तुत है एक ऐसी रचना, जो न सिर्फ़ शब्दों में, बल्कि भावना में भी भारत की माटी की सुगंध समेटे हुए है। यह कविता है—समर्पण, सम्मान, संस्कार और सनातन…
हिन्दी कविता - शिव शक्ति संकल्प - इस दिव्य काव्य में शिव और शक्ति के अद्वितीय संगम को दर्शाया गया है—जहाँ हर नारी में दुर्गा का स्वरूप जाग्रत होता है और हर पुरुष शिवत्व को धारण करता है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि सृष्टि का हर कण पवित्र…
Emotional Hindi Poem on Loneliness - रात की ख़ामोशी, धुँध में ढका आसमान, और दिल में ठहर गया एक अधूरा इंतज़ार—इन्हीं एहसासों के बीच जन्म लेती है यह कविता। यह एक ऐसे दिल की दास्ताँ है जो यादों की धुंध में भटक रहा है, जिसकी हर साँस में किसी अपने…
आप पढ़ रहे हैं राम पर कविता राम पर कविता शबरी के जूठे बेरों सेजो तनिक नहीं भी बैर कियासब ऊंच - नीच के भेदों से जो ना अपना ना गैर किया उस पुरषोत्तम श्री रामचन्द्रको आज कहां से लाऊं मैंअब लखन जानकी संग रामको देख कहीं …
राम मंदिर पर हिंदी कविता राम मंदिर पर हिंदी कविता जय श्री राम के नारे को,भारत में सबको सुनाएंगे,देशभक्ति , हिंदुत्व जगाने, हम घर घर को जायेंगे,देशभक्ति , हिंदुत्व जगाने, सत्य सनातन धर्म ध्वजा का, मान बढ़ाना ध्येय है,विश्व गुरु भारत फिर होगा, कुछ इसमें ना संदेह है,देकर तन मन…
आप पढ़ रहे हैं दरिद्रता पर कविता :- दरिद्रता पर कविता सुबह सबेरेतड़तड़ाहट की आवाजकानों में पड़ते हीनीद टूटी,मैं जाग पड़ा, देखा किलोग सूप पीट पीट करदरिद्र" भगा रहे थेघर के कोने-कोने सेआंगन बाग बगीचे से, मैं समझ न पायादरिद्र कहां है?कौन है?भागा या नहीं! दरिद्र मनुष्य खुदअपने कर्म सेअपने सोंच…
आप पढ़ रहे हैं ठंड पर हास्य कविता :- ठंड पर हास्य कविता माह दिसम्बर चहुं दिगम्बरछाया कुहरा धरती अम्बर,न आगे न पीछे सूझैकाव करी कुछ मन न बूझै ठंडी कै बढ़ि गै प्रकोपबाप रे बप्पा होइ गै लोपभइल रात दिन एक समानकइसे बचै बाप रे जान ठंडी ठंडी बहय…