स्वास्थ्य पर दोहे | Sehat Dohawali In Hindi

“तेज़ी से बदलती आधुनिक जीवनशैली ने मनुष्य को सुविधा तो दी, पर साथ ही छीन लिए उसके स्वाभाविक व्यायाम, शारीरिक अनुशासन, और पारंपरिक जीवन मूल्य। आज की यह रचना स्वास्थ्य पर दोहे—आलस्य, गलत आदतों और अंधाधुंध आधुनिकरण के कारण उभरते रोगों को उजागर करती है। यह दोहे केवल शब्द नहीं,…

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महाकाल पर कविता – श्री महाकाल तांडव स्तुति | Mahakal Par Kavita

आदि से अनंत तक, सृष्टि से संहार तक जो स्वयं समय के भी स्वामी हैं, जो शून्य में स्थित होकर भी संपूर्ण ब्रह्मांड को धारण करते हैं, जिनकी जटाओं से बहती गंगाजल की धारा, और जिनके डमरू से उत्पन्न हुआ प्रथम नाद। आज प्रस्तुत है—महादेव की महिमा को समर्पित एक…

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मातृभूमि पर कविता – मातृभूमि ( माँ ) तुझे प्रणाम | Matrubhumi Par Kavita

“इस पवित्र धरा की अनंत महिमा, उसके असीम गौरव और हमारी आत्मा में बसती मातृभूमि के प्रति श्रद्धा को समर्पित आज प्रस्तुत है एक ऐसी रचना, जो न सिर्फ़ शब्दों में, बल्कि भावना में भी भारत की माटी की सुगंध समेटे हुए है। यह कविता है—समर्पण, सम्मान, संस्कार और सनातन…

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हिन्दी कविता – शिव शक्ति संकल्प | Hindi Kavita Shiv Shakti Sankalp

हिन्दी कविता - शिव शक्ति संकल्प - इस दिव्य काव्य में शिव और शक्ति के अद्वितीय संगम को दर्शाया गया है—जहाँ हर नारी में दुर्गा का स्वरूप जाग्रत होता है और हर पुरुष शिवत्व को धारण करता है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि सृष्टि का हर कण पवित्र…

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Emotional Hindi Poem on Loneliness – धुँध, सन्नाटा और इंतज़ार | Heart-Touching Poetry

Emotional Hindi Poem on Loneliness - रात की ख़ामोशी, धुँध में ढका आसमान, और दिल में ठहर गया एक अधूरा इंतज़ार—इन्हीं एहसासों के बीच जन्म लेती है यह कविता। यह एक ऐसे दिल की दास्ताँ है जो यादों की धुंध में भटक रहा है, जिसकी हर साँस में किसी अपने…

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हिंदुस्तान की कविता – चमका दो हिंदुस्तान को | Hindustan Ki Kavita

आप पढ़ रहे हैं हिंदुस्तान की कविता हिंदुस्तान की कविता नहला अरि की रक्त धारचमका दो हिंदुस्तान को,मान बढा़ने वीरों कामिटवा दो आतंकिस्तान को। वंदेमातरम वंदेमातरम…….वंदेमातरम वंदेमातरम……. देख सपूतों की कुर्बानीआज तिरंगा झुका पडा़,खेल सियासी देख-देख केहर सेनानी रूका पडा़,पश्चिम की सीमा पे देखोशैतानों के ठाठ है,रोता आँसू खून के…

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राम पर कविता – पुरषोत्तम श्री रामचन्द्र | Ram Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं राम पर कविता राम पर कविता शबरी    के   जूठे   बेरों   सेजो तनिक नहीं भी बैर कियासब  ऊंच - नीच  के भेदों से जो  ना  अपना ना गैर किया उस  पुरषोत्तम  श्री  रामचन्द्रको  आज  कहां  से लाऊं मैंअब  लखन जानकी संग रामको  देख  कहीं …

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राम मंदिर पर हिंदी कविता – जय श्री राम के नारे | Ram Mandir Par Hindi Kavita

राम मंदिर पर हिंदी कविता राम मंदिर पर हिंदी कविता जय श्री राम के नारे को,भारत में सबको सुनाएंगे,देशभक्ति , हिंदुत्व जगाने, हम घर घर को जायेंगे,देशभक्ति , हिंदुत्व जगाने, सत्य सनातन धर्म ध्वजा का, मान बढ़ाना ध्येय है,विश्व गुरु भारत फिर होगा, कुछ इसमें ना संदेह है,देकर तन मन…

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माँ को समर्पित कविता – तु कितनी सुंदर है माँ | Maa Ko Samarpit Kavita

माँ को समर्पित कविता माँ को समर्पित कविता गीत लिखुँ तुझ पर माँया लिखुँ कोई कविता,रो पड़ा हुँ देख करतेरे आँचल में ममता, तु कितनी सुंदर है माँतु कितनी प्यारी है माँ,कितना भी देखुं तुझेमन नहीं भरतामन नहीं भरता…. बनाने वाले ने तुझे माँक्या खूब बनाया है,रोम-रोम में बसी तेरेस्नेहपूर्ण…

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दरिद्रता पर कविता | Daridrata Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं दरिद्रता पर कविता :- दरिद्रता पर कविता सुबह सबेरेतड़तड़ाहट की आवाजकानों में पड़ते हीनीद टूटी,मैं जाग पड़ा, देखा किलोग सूप पीट पीट करदरिद्र" भगा रहे थेघर के कोने-कोने सेआंगन बाग बगीचे से, मैं समझ न पायादरिद्र कहां है?कौन है?भागा या नहीं! दरिद्र मनुष्य खुदअपने कर्म सेअपने सोंच…

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ठंड पर हास्य कविता – हाड़ कपावै थर थर ठण्डी |

आप पढ़ रहे हैं ठंड पर हास्य कविता :- ठंड पर हास्य कविता माह दिसम्बर चहुं दिगम्बरछाया कुहरा धरती अम्बर,न आगे न पीछे सूझैकाव करी कुछ मन न बूझै ठंडी कै बढ़ि गै प्रकोपबाप रे बप्पा होइ गै लोपभइल रात दिन एक समानकइसे बचै बाप रे जान ठंडी ठंडी बहय…

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प्रार्थना कविता – कण-कण में ही तुम्हीं बसे हो | Prarthana Kavita

आप पढ़ रहे हैं प्रार्थना कविता - कण-कण में ही तुम्हीं बसे हो :- प्रार्थना कविता पर्वत  घाटी  ऋतु  वसंत  मेंनभ थल जल में दिग्दिगंत मेंभक्ति  भाव  और अंतर्मन मेंसदा  निरंतर  आदि  अंत  में युगों युगों तक तुम्हीं अजेय हो,कण-कण में ही  तुम्हीं बसे हो।  सृष्टि  दृष्टि  हर  दिव्य  गुणों…

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