गाँव पर कविता | गाँव की याद में कविता | Gav Par Hindi Kavita

Gav Par Kavita In Hindi गाँव पर कविता शहर में आने के बाद गाँव की यादें ही साथ रह जाती हैं। उन्हीं यादों पर आधारित है यह गाँव पर कविता :- Gav Par Kavita In Hindiगाँव पर कविता आके शहर वो हम गांव को भूल गए,रिश्ते जो थे वो गांव…

Continue Readingगाँव पर कविता | गाँव की याद में कविता | Gav Par Hindi Kavita

राहत इंदौरी जी के नाम शब्दों की इक श्रद्धांजलि

इस दुनिया को छोड़ जाने के बाद एक उम्दा शायर राहत इंदौरी जी के नाम शब्दों की इक श्रद्धांजलि :- राहत इंदौरी जी के नाम चंद मोती शब्दों के पिरोह इक माला बनाई है, श्रद्धांजलि समझ उन्हें पहनाई है। क्यूँ कहते हो वे चले गए, अपनी शायरी नज्मों में तो…

Continue Readingराहत इंदौरी जी के नाम शब्दों की इक श्रद्धांजलि

ग़ज़ल कन्हैया आप मुझको | Ghazal Kanhaiya Aap Mujhko

मीरा बन कर भगवान श्री कृष्ण को दर्शन देने के लिए प्रार्थना करती हुई एक भक्त की ग़ज़ल कन्हैया आप मुझको :- ग़ज़ल कन्हैया आप मुझको कन्हैया आप मुझको क्यों नहीं मीरा समझते हो। नहीं कोई यहाँ मेरा तुम्हीं पीड़ा समझते हो।। मुझे तुम भूल मत जाना कहे देती अभी…

Continue Readingग़ज़ल कन्हैया आप मुझको | Ghazal Kanhaiya Aap Mujhko

कृष्ण पर कविता :- तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा

भगवान श्री कृष्ण के चरणों में एक दर्शनअभिलाषी भक्त की करुण पुकार पर कविता " कृष्ण पर कविता " कृष्ण पर कविता तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा। आओ कन्हाई आओ कन्हाई।। तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा-- कान्हा तूने राधा से प्रीत लगाई। प्रीत लगा के कैसे…

Continue Readingकृष्ण पर कविता :- तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा

परशुराम पर कविता :- हे धीर वीर परशुराम

हमारे सामाज में फ़ैल रही बुराइयों का अंत करने के लिए परशुराम से को आकर पाप मिटाने की प्रार्थना पर कविता " परशुराम पर कविता " परशुराम पर कविता हे धीर वीर परशुराम आज धरा पर आ जाओ। ले कृपाण फिर हाथ प्रभू धरती का भार मिटाओ। गली गली में…

Continue Readingपरशुराम पर कविता :- हे धीर वीर परशुराम

स्त्री पर कविता :- उड़ना चाहती थी | Stree Par Kavita

स्त्री पर कविता स्त्री के प्रति हमारे समाज में बहुत पुरातन समय से यह धारणा चली आती रही है कि वो कभी भी पुरुष की बराबरी नहीं कर सकती। स्त्री की इसी व्यथा को बयान कर रही है यह स्त्री पर कविता :- Stree Par Kavitaस्त्री पर कविता उड़ना चाहती…

Continue Readingस्त्री पर कविता :- उड़ना चाहती थी | Stree Par Kavita

पावस ऋतु पर कविता :- श्यामल काली घटा | Pavas Ritu Par Kavita

बारिश की रिमझिम बूंदों के दृश्य का वर्णन करती पावस ऋतु पर कविता " श्यामल काली घटा " :- पावस ऋतु पर कविता मैं देख दंग रह गया छवि छटा! नीलनभ में श्यामल काली घटा!! मानो वह वर्षासुन्दरी की आँखो की हो काजल ! उसे देख मन मेरा हो रहा…

Continue Readingपावस ऋतु पर कविता :- श्यामल काली घटा | Pavas Ritu Par Kavita

वतन पर कविता :- ये है मेरा वतन | Watan Par Kavita

देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत वतन पर कविता " ये है मेरा वतन " :- वतन पर कविता ये है मेरा वतन मेरा गंगा जमन। ये देश है गौतम गांधी काये देश है नेहरू शास्त्री कायहाँ तिरंगा प्यारा हैयहाँ गंग जमुन की धारा हैमेरा तन मन मेरा है जीवन।…

Continue Readingवतन पर कविता :- ये है मेरा वतन | Watan Par Kavita

हिंदी कविता इक प्रार्थना :- तुझे मनाने आई हूँ

कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान कृष्ण से आशीर्वाद प्राप्त करने की अभिलाषा से लिखी गयी ( Hindi Kavita Ik Prarthna ) हिंदी कविता इक प्रार्थना हिंदी कविता इक प्रार्थना कान्हा तेरे जन्मदिन की बधाई तुझे बारम्बार देती हूँ, मुश्किलों में संभाला तूने दुहाई इसकी देती हूँ। स्नेह के…

Continue Readingहिंदी कविता इक प्रार्थना :- तुझे मनाने आई हूँ

चिड़िया पर हिंदी कविता :- चिड़िया रानी | Chidiya Par Kavita

सुबह-सुबह चहचहाने वाले और उड़ कर दाने की तलाश में जाने वाली चिड़िया पर हिंदी कविता :- चिड़िया पर हिंदी कविता चिड़िया रानी चिड़िया रानी डाल डाल पर जाती हो सूरज की सुबह लाली में मधुर तान सुनाकर सबको रोज जगाती हो। खूब करती मेहनत, जीवन पथ पर अथक बढ़ती…

Continue Readingचिड़िया पर हिंदी कविता :- चिड़िया रानी | Chidiya Par Kavita

हिंदी कविता कौन थी वो :- प्रशांत त्रिपाठी द्वारा रचित कविता

किसी खास की याद में हिंदी कविता कौन थी वो :- हिंदी कविता कौन थी वो कौन थी वो जो मुस्कुरा के चली गई, मेरे दिल में प्रीत की आश जगा के चली गई। जैसे पके फल को देखकर आता है मुंह में पानी, वैसे ही मुझे इमली दिखा के…

Continue Readingहिंदी कविता कौन थी वो :- प्रशांत त्रिपाठी द्वारा रचित कविता

जिंदगी की कविता :- लौट आ मेरी ज़िन्दगी | Zindagi Ki Kavita

उदास हो चुकी जिंदगी को फिर से मानाने की कोशिश की कविता " जिंदगी की कविता " जिंदगी की कविता लौट आ मेरी ज़िन्दगी तू कहीं से तन्हाई का दामन तोड़ते हुए, हवा के झोंकों के साथ फिर से मुझे तारों ताजा कर दें, मुरझा गई है जिंदगी सूखे गुलाब…

Continue Readingजिंदगी की कविता :- लौट आ मेरी ज़िन्दगी | Zindagi Ki Kavita