हिंदी कविता इक प्रार्थना :- तुझे मनाने आई हूँ

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कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर भगवान कृष्ण से आशीर्वाद प्राप्त करने की अभिलाषा से लिखी गयी ( Hindi Kavita Ik Prarthna ) हिंदी कविता इक प्रार्थना

हिंदी कविता इक प्रार्थना

हिंदी कविता इक प्रार्थना

कान्हा तेरे जन्मदिन की बधाई
तुझे बारम्बार देती हूँ,
मुश्किलों में संभाला तूने
दुहाई इसकी देती हूँ।

स्नेह के कुछ पुष्प औ ‘
अश्रुओं की इक माला संग लाई हूँ,
बैठी हूँ दर पे तेरे कबसे
हे नाथ, तुझे मनाने आई हूँ।

प्रेम मेरा अमिट है
दिखलाऊं तुझे कैसे?
पूजा मैं करूं वैसे
बता मान जाए तू जैसे।

बस जाए रोम – रोम में तू मेरे
प्रार्थना यही करती हूँ,
ये अपना तन मन मैं
तुझे समर्पित करती हूँ।

सोते – जागते हर पल
तुझे नमन करती हूँ,
अपने सम्पूर्ण भावों को
तुझे मैं अर्पण करती हूँ।

चंचलता शब्दों की नहीं कोई
लिए तेरे पास आई हूं,
निश्छल हृदय से
श्रद्धा के कुछ प्रसाद
तुझे चढ़ाने आई हूं।

झूठा विश्वास, झूठी प्रतिष्ठा
निर्मम समाज की
अब और न सह सकूंगी,
मिट जाऊँ तुझमें मैं बस
यही आस करूंगी।

पढ़िए :- श्री कृष्ण पर कविता “बसो मोरे हिरदे में गोपाल”


रचनाकार का परिचय

वंदना अग्रवाल निरालीनाम – वंदना अग्रवाल निराली
पता – लखनऊ, उत्तर प्रदेश

वंदना जी एक पत्नी, गृहिणी, माँ, बहु और शिक्षिका हैं। इन्हें कविताएँ लिखने और पढ़ने का शौक है।
इनकी कविता रूपायन पत्रिका और दूसरी वेबसाइट पर भी प्रकाशित होती रही है।

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