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प्रकाश रंजन मिश्र

पद-: सहायकप्राध्यापक, वेद-विभाग(अ.), राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान जयपुर परिसर, जयपुर (राजस्थान)
अध्यायन स्थल-: श्रीसोमनाथसंस्कृतविश्वविद्यालय,वेरावल, (गुजरात)
आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान वेद विद्यालय मोतिहारी (बिहार)
वेद विभूषण वेदाचार्य(M.A), नेट, गुजरात सेट, लब्धस्वर्णपदक, विद्यावारिधि(ph.d) प्रवेश
डिप्लोमा कोर्स :- योग, संस्कृतशिक्षण,मन्दिरव्यवस्थापन,कम्प्युटर एप्लिकेशन।
प्रकाशन :- 7 पुस्तक एवं 15 शोधपत्र,10 कविता
सम्मान :- ज्योतिष रत्न, श्री अर्जुन तिवारी संस्कृत साहित्य पुरस्कार से सम्मानित

स्थायीपता :- ग्राम व पोस्ट -:डुमरा, थाना -कोटवा ,जिला- पूर्वी चंपारण (बिहार)

तुम याद बहुत आती हो कविता | Yaad Bahut Aati Ho Kavita

दर्द भरी कविता

+4 तुम याद बहुत आती हो कविता हम क्या सोचते है और क्या होता है ना जाने ये दिल क्यों रोता है, नजरों से तुम सब कुछ कह जाती हो , तुम याद बहुत आती हो। तेरे बिन हर पल बुरा लगता है, तेरा चेहरा सामने हो तो मन पराग सा खिलता है , आँखें …

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तितली पर कविता :- तितली रानी | Butterfly Poem In Hindi

हिन्दी प्रेरक कविता

+2 आप पढ़ रहे हैं ( Butterfly Poem In Hindi ) तितली पर कविता :- तितली पर कविता तितली रानी, तितली रानी तुम तो बड़ी सयानी हो, तुम तो सबके मन को भाती हो फूल पर बैठकर पराग तुम चुराती हो। फूल तुमको देखकर अपना रंग बदलते है, और बच्चे तुम्हें देख खुशी से खिल …

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हिंदी कविता गांव पर :- गांँव की तो बातें ही निराली | Gaon Kavita

अपना गाँव कविता

+2 हिंदी कविता गांव पर हरी भरी हरियाली तेरी मोह लेती हो मन को मेरी, हमेशा अपनी याद दिलाती गांँव की तो बातें ही निराली। कही चौपल पर बैठ कर बड़े एक दूसरे से बाते करते, कहीं छोटे-छोटे बच्चे खेले और मुलाकाते करें, सब जगह खुशी का माहौल बने जैसे होली माने दिवाली गांँव की …

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पिता पर हिंदी कविता :- पिता हमारे सुख दु:ख | Pita Par Kavita

पिता पर हिंदी कविता

+2 पिता पर हिंदी कविता नहीं पता की वो अपने दिल में कितना दर्द दबाते हैं, पिता हमारे सुख दु:ख में सदा ही मुस्कुराते हैं। पिता विन सब सूना, पिता हमारी पहचान है, पिता ही आस पिता ही विश्वास है, पिता से ही सब जग मेरा पिता हमारी सांस है। कष्ट जब पड़ता है कभी …

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Maa Ki Yaad Kavita | माँ की याद कविता

माँ की महिमा कविता

+2 आप पढ़ रहे हैं ( Maa Ki Yaad Kavita ) माँ की याद कविता :- माँ की याद कविता Maa Ki Yaad Kavita तू ममता की मूरत, तू करुणा की सागर है, तेरे बिन ये सब जग सूना, तेरे बिन परिवार अधूरा, तू हमेशा हंसती थी माँ, हम सब को भी हंसाती थी, पर …

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दोस्त पर कविता :- ए दोस्त तू प्यारा है | Dost Par Kavita

बचपन की यादें पर कविता

0 दोस्त पर कविता जिंदगी में जब से तू आया है, सारी खुशियों ने अपना डेरा मेरे पास ही बनाया है, मैं अम्बर सा प्यासा हूँ, तू समुद्र की बहती धारा है, हमको अपनी जान से ज्यादा ए दोस्त तू प्यारा है। तेरे साथ होने से मुझे कभी किसी चीज कमी ना आई सारे नाते …

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भाई पर कविता :- मेरे भाई तुम | Bhai Par Kavita

बहन पर कविता

+1 भाई पर कविता हर ख़ुशी में, हर गम में, हर समय पर आपका साथ हो मेरे भाई तुम पापा के नाज हो। हम सब की सारी खुशियों का तुम ही एक राज हो, तुम ही तो बहनों की, राखी का लाज हो, वैसे तो तुम पत्थर की तरह कठोर हो, लेकिन जब हम पर …

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बहन की याद में कविता :- मेरी प्यारी बहना | Bahan Par Kavita

बहन पर कविता

+3 बहन की याद में कविता मेरी प्यारी बहना तुम हमेशा मुझे सताती हो, मेरी झूठी बात को भी, सही हमेशा मान जाती हो, मेरी प्यारी बहना मुझको तुम बहुत याद आती हो । वो हमारे बचपन के झगड़े अभी भी याद आते है, बचपन की सब प्यारी बातें, सारे रिश्ते सारे नाते, बचपन के …

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हनुमान जी पर कविता :- जय हनुमान | Hanuman Ji Par Kavita

हनुमान जी पर कविता

+1 आप पढ़ रहे हैं हनुमान जी पर कविता :- हनुमान जी पर कविता जय हनुमान ज्ञान के सागर, कृपा करो हे कष्ट के नाशक, पवनतनयअंजनी के लाला, श्रीरामजी की सेवा ही है काम तुम्हारा। बल बुद्धि के तुम हो स्वामी कृपा करो हे जग के स्वामी। ज्ञान शक्ति के तुम हो दाता दुखियों के …

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हिंदी कविता हम भारतवासी | Hindi Kavita Hum Bharatwasi

हिंदी कविता रक्त उबलते देख रहा हूँ

+1 हिंदी कविता हम भारतवासी दर्द में भी खुशी मनाते हैं, इसीलिए हम भारतवासी कहलाते हैं। दर्द मतलब कुछ नहीं, हंसते हंसते सारी मुश्किलें पार कर जाते हैं, इसीलिए हम भारतवासी कहलाते हैं। फर्क नहीं पडता कौन क्या कहता है, हम तो सबको सुखी देखना चाहते हैं, इसीलिए हम भारतवासी कहलाते हैं। भेद-भाव सब त्याग …

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फूल की अभिलाषा कविता | Phool Ki Abhilasha Kavita

हिंदी कविता अभिलाषा 

+2 फूल की अभिलाषा कविता फूल हूँ मैं छोटा सा, यही मेरे जीवन की परिभाषा है। देवों के चरणों में चढ़ जाऊं, मेरे जीवन की छोटी सी अभिलाषा है। चाह नहीं मुझे की मैं गहने में गूँथा जाऊ, चाह नहीं सुन्दर नारी बन, स्वयं पर इठलाऊँ। उन पावन चरणों को छूकर, चरण रज बन जाऊं, …

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सकारात्मक सोच पर कविता | Sakaratmak Soch Par Kavita

हिंदी कविता समझदारी और बदलाव

+3 सकारात्मक सोच पर कविता सोच ऐसी राखिए, सब आपसे स्नेह बनाए , सबके साथ मिल जुलकर आप मार्ग दर्शक बनजाए , हम हमेशा खुश रहे और दूसरों को भी खुश कर पाए, हम किसी को उठा न सके तो उसे गिराया भी न जाए।। हम जानते है कि, न सबको सब कुछ आए, फिर …

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