सकारात्मक सोच पर कविता | Sakaratmak Soch Par Kavita

सकारात्मक सोच पर कविता

सकारात्मक सोच पर कविता

सोच ऐसी राखिए, सब आपसे स्नेह बनाए ,
सबके साथ मिल जुलकर आप मार्ग दर्शक बनजाए ,
हम हमेशा खुश रहे और दूसरों को भी खुश कर पाए,
हम किसी को उठा न सके तो उसे गिराया भी न जाए।।

हम जानते है कि, न सबको सब कुछ आए,
फिर भी हमसब मिलकर, हमेशा उसका मान बढाए,
हम हमेशा खुश रहे और दूसरों को भी खुश कर पाए,
हम किसी को उठा न सके तो उसे गिराया भी न जाए।।

सोचता हूँ इस जग मे,सभी एक समान हो जाए ,
पर क्या करुँ, कुछ लोगो की वजह से ऐसा भी न हो पाए
हम हमेशा खुश रहे और दूसरों को भी खुश कर पाए,
हम किसी को उठा न सके तो उसे गिराया भी न जाए।।

अगर कोई गिर रहा है, तो हम उसका आधार बन जाए,
जाति धर्म से ऊपर उठकर अपनी पहचान बनाए,
हम हमेशा खुश रहे और दूसरों को भी खुश कर पाए,
हम किसी को उठा न सके तो उसे गिराया भी न जाए।।

दुनिया बडी निराली है ,उसे और भी सुन्दर बनाए,
हम रहे ग्वाल-बाल संघ हमसे कोई दुखी हो न पाए,
हम हमेशा खुश रहे और दूसरों को भी खुश कर पाए,
हम किसी को उठा न सके तो उसे गिराया भी न जाए।।

पढ़िए :- कर्म पर कविता “कर्म युद्ध के भीषण रण में”


प्रकाश रंजन मिश्रनाम :- प्रकाश रंजन मिश्र
पिता :- श्री राज कुमारमिश्र
माता :- श्रीमती मणी देवी
जन्मतिथि :- 05/05/1996
पद-: सहायकप्राध्यापक, वेद-विभाग(अ.), राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान जयपुर परिसर, जयपुर (राजस्थान)
अध्यायन स्थल-: श्रीसोमनाथसंस्कृतविश्वविद्यालय,वेरावल, (गुजरात)
आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान वेद विद्यालय मोतिहारी (बिहार)
वेद विभूषण वेदाचार्य(M.A), नेट, गुजरात सेट, लब्धस्वर्णपदक, विद्यावारिधि(ph.d) प्रवेश
डिप्लोमा कोर्स :- योग, संस्कृतशिक्षण,मन्दिरव्यवस्थापन,कम्प्युटर एप्लिकेशन।
प्रकाशन :- 7 पुस्तक एवं 15 शोधपत्र,10 कविता
सम्मान :- ज्योतिष रत्न, श्री अर्जुन तिवारी संस्कृत साहित्य पुरस्कार से सम्मानित

स्थायीपता :- ग्राम व पोस्ट -:डुमरा, थाना -कोटवा ,जिला- पूर्वी चंपारण (बिहार)

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