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निमिषा सिंघल

निमिषा जी का एक कविता संग्रह, व अनेक सांझा काव्य संग्रहों में रचनाएं प्रकाशित हैं। इसके साथ ही अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं की वेबसाइट पर कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं।

उनकी रचनाओं के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है जिनमे अमृता प्रीतम स्मृति कवयित्री सम्मान, बागेश्वरी साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान सहित कई अन्य पुरुस्कार भी हैं।

हंसना भूल न जाओ कविता | Hasna Bhool Na Jao Kavita

हंसना भूल न जाओ

+1 आप पढ़ रहे हैं कविता हंसना भूल न जाओ :- हंसना भूल न जाओ तल्ख सी है..फिजाएं कुछ, अजब सी बेमियाजी़ है। ज़ायका गुम हुआ कुछ यूं, कि हर शय में खराबी है। नमी आंखों में दिखती है, हृदय भी ग़म से भारी है। उदासी का है यह आलम, जुबां शब्दों से ख़ाली है। …

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मजदूर पर हिंदी कविता | Mazdoor Par Hindi Kavita

मजदूर पर कविता

0 आप पढ़ रहे हैं मजदूर पर हिंदी कविता :- मजदूर पर हिंदी कविता मुट्ठी में बंद उष्णता, सपने, एहसास लिए, खुली आंखों से देखता है कोई ….. क्षितिज के उस पार। बंद आंखों से रचता है इंद्रधनुषी ख्वाबों का संसार। झाड़ता है सपनों पर उग आए कैक्टस और बबूल…. रोपता है सुंदर फूलों के पौधे …

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हिंदी कविता काल ने तांडव रचा | Kaal Ne Tandav Rachaa

हिंदी कविता काल ने तांडव रचा

0 आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता काल ने तांडव रचा :- हिंदी कविता काल ने तांडव रचा काल ने तांडव रचा.. जीना मुश्किल हुआ, चंद सांसें भी लेना दुश्वार हुआ.. सांसे बिकती है ..बोलो खरीदोगे? बिकता है जमीर खरीदोगे? मुनाफाखोर ले रहे मुनाफे का मजा.. उन्हें क्या मतलब!! देश पर संकट घना। बेबसी का …

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हिंदी कविता अनुरोध | Hindi Kavita Anurodh

व्यवहार पर कविता

0 आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता अनुरोध :- हिंदी कविता अनुरोध तंज.. छेद देते हैं अंतर्मन… नासूर बन जाते हैं यह जहर बुझे शब्द। घुटन… तेजाब बन जला देती है संवेदनाएं । अनबोलापन…. खा जाता है रिश्तों को। अकेलापन… भयभीत करता है। तेज आवाजें सच को छुपाने में अक्षम रहती हैं। लड़ाई … किसी …

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विश्व जल दिवस पर व्यंग्य | Vishva Jal Diwas Par Vyangya

जल संरक्षण पर कविता

0 आप पढ़ रहे हैं विश्व जल दिवस पर व्यंग्य :- विश्व जल दिवस पर व्यंग्य जल संरक्षण स्लोगन बन कर… लटक रहा हर द्वार, नेताजी चिल्ला कर बोले.. जल बचाओ.. मेरे यार। कार्यालय में अधिवेशन है बहस बड़ी जोरदार, छत पर ऊपर टंकी भर गई… फैलता रहा जल.. घंटों हुआ बर्बाद, और नीचे… सभाएं …

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नाराजगी पर कविता | Narazgi Par Kavita

हिंदी कविता प्रेम के दुश्मन

0 आप पढ़ रहे हैं नाराजगी पर कविता :- नाराजगी पर कविता जब नाराज़ हो जाती हो तुम.. बैचेन हो जाता हूं मै। तारों बिन.. उदास आसमान सा। जैसे सूर्य की लालिमा पर मंडराया हो काला बादल। जैसे काली कजरारी आंखों से बह निकला हो काजल। जैसे भरभरा के फट पड़ा हो बादल..। वह प्यारी …

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आंसू पर कविता – बूंद | Aansu Par Kavita

हंसना भूल न जाओ

0 आप पढ़ रहे हैं आंसू पर कविता – बूंद आंसू पर कविता बूंद हूं मैं एक खारी, छलकी.. हो चक्षु से भारी, बहकी बन सुख- दुख की मारी, बूंद हूं मैं एक खारी..। मन, हृदय सब गम से भारी… कर गया आंखों को हारी, बोझ सारा मैं समेटे, चल पड़ी.. हो मैं दीवानी। बूंद …

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हिंदी कविता साहित्यकार | Hindi Kavita Sahityakar

हिंदी कविता साहित्यकार

0 आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता साहित्यकार हिंदी कविता साहित्यकार कितना कुछ जानते हो तुम साहित्यकार! कदमों की चाल से नाप लेते हो थकान.. भांप लेते हुए आंखों की कोर में. .. सफाई से छुपाया गया एक रेगिस्तान। पहचान लेते हो बदलते मिजाज की कड़वाहट.. बदल जाते हो उसी क्षण अचानक..। महसूस कर लेते …

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हिंदी कविता सफलता | Hindi Kavita Safalta

हिंदी कविता गुमराह

0 आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता सफलता :- हिंदी कविता सफलता बुझ रहे हो दीयें सारे, ओट कर.. जलाए रखना। जल विहीन भूमि से भी, तुम….निकाल लोगे जल.. विश्वास को बनाए रखना। अंधकार व्याप्त हो.. सूर्य की तलाश हो, मार्ग जुगनूओं की रोशनी से तुम सजाए रखना। मुश्किलें मिले अगर, डर के लौटना न …

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संगीत पर कविता | Sangeet Par Kavita

संगीत पर कविता

0 आप पढ़ रहे हैं संगीत पर कविता :- संगीत पर कविता सरहदों में बंध जाए वह संगीत ही क्या! भाषाओं की बेड़ियां जकड़ ले वो गीत ही क्या! संगीत किसी संस्कृति सभ्यता में कैद हो जाए… असंभव है। कौन बांध पाया है नदियों की कल -कल को? कौन रोक पाया है चिड़ियों के कलरव …

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हिंदी कविता मृगमरिचिका | Hindi Kavita Mrig Marichika

हिंदी कविता गुमराह

0 आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता मृगमरिचिका :- हिंदी कविता मृगमरिचिका मृगमरिचिका जीवन सारा तृष्णा में डूबा जाता है। तृष्णाग्रस्त हो खोया रहता , हाथ नहीं कुछ आता है। मरुभूमि में उज्जवल जल सा… बार-बार बहकाता है। कस्तूरी सा दिशाविहीन मन, भटका- भटका जाता है। रेत ,खार की परतों पर सूर्य, चंद्र जब प्रकाश …

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हिंदी कविता मुकदमा | Hindi Kavita Mukadma

हिंदी कविता मुकदमा

+1 आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता मुकदमा :- हिंदी कविता मुकदमा संस्कृति ,सभ्यता, परंपराएं.. कटघरे में घबरायें, पेशी हैआज उनकी… आधुनिकता मुस्कुराए। निगल जाएगी वह जैसे आंखें उन्हें दिखाएं । घबराहट और डर से तीनों दम तोड़ती सी जाएं। मुकदमा पहला खोला, जोरदारी से है वह बोली, शोषण की लंबी सूची.. सदियों से डाला …

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