निमिषा सिंघल

निमिषा जी का एक कविता संग्रह, व अनेक सांझा काव्य संग्रहों में रचनाएं प्रकाशित हैं। इसके साथ ही अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं की वेबसाइट पर कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं।

उनकी रचनाओं के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है जिनमे अमृता प्रीतम स्मृति कवयित्री सम्मान, बागेश्वरी साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान सहित कई अन्य पुरुस्कार भी हैं।

नदी पर कविता | Nadi Par Kavita | Beautiful Poem On River

नदी पर कविता

Nadi Par Kavita – आप पढ़ रहे हैं नदी पर कविता :- Nadi Par Kavitaनदी पर कविता काव्य की जननी,प्राण प्रदायिनी नदियां..लेखनी बना लेती है सूर्य कीअनगिनत रश्मियों और चन्द्रकिरणों को । लिखा जाता है अद्भुत काव्य प्रकृति की छांँव तले।अपने काव्य से हिमखंडों को पिघला…बह निकली हैं नदियां जीवनदायनी बन।चंचल, उन्मुक्त, खिलखिलाती… लहराती. . । झरने को सुनाती है …

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Koyal Par Kavita | कोयल पर कविता – कोकिला

Koyal Par Kavita

Koyal Par Kavita – आप पढ़ रहे हैं कोयल पर कविता ” कोकिला “ Koyal Par Kavitaकोयल पर कविता कानों में मिश्री सी घोले,काली ‘ कोकिला ‘ मीठा बोले। मीठी तान सुनाती हैगुण अमूल्य समझाती है। पतझड़ हो या रहे बसंत,सुर में मगन हो जाती है। दिन देखें न रात कभी,बड़ी लगन से गाती है। कुहू -कुहू की …

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आदिवासी कविता | Adivasi Kavita In Hindi

Poem On Farmer In Hindi

आप पढ़ रहे हैं ( Adivasi Kavita ) आदिवासी कविता :- आदिवासी कविता शोषित,अपेक्षित, इस धरती के वासी,आदिवासी बनाम मूल निवासी। विकास है बाधक…विस्थापन की मार।कट रहे जंगल,खो रहे ये रोजगार। अस्मिता खतरे मेंफिर भी खुद को रहे संभाल,सांस्कृतिक विरासत के असली हकदार। सुदूर ..अंचल निवासीभूल रहे गीत,न रही बांसुरीन रहा मांदर संगीत। कौन बोयेगा दोना?कौन बोयेगा पतरी?जब सखुआ, …

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कविता फूल बन महकना | Motivational poem

Kaidi Aur Kokila

आप पढ़ रहे हैं कविता फूल बन महकना :- कविता फूल बन महकना काँटों की सेज जीवन,तुझे पार है उतरना…कष्टों की झाड़ियों परतुझे फूल बन महकना। मुश्किल हो रास्ता गर,लगी बड़ी डगर हो..हिम्मत न हारना तुम,मन में तेरी लगन हो। गर डर के तुम न लौटे,मंजिल तुम्हें मिलेगी..तेरे बनाये रास्तों पर,दुनिया ये चल पड़ेगी। पैरों …

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हंसना भूल न जाओ कविता | Hasna Bhool Na Jao Kavita

हंसना भूल न जाओ

आप पढ़ रहे हैं कविता हंसना भूल न जाओ :- हंसना भूल न जाओ तल्ख सी है..फिजाएं कुछ, अजब सी बेमियाजी़ है। ज़ायका गुम हुआ कुछ यूं, कि हर शय में खराबी है। नमी आंखों में दिखती है, हृदय भी ग़म से भारी है। उदासी का है यह आलम, जुबां शब्दों से ख़ाली है। उदासी …

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मजदूर पर हिंदी कविता | Mazdoor Par Hindi Kavita

मजदूर पर कविता

आप पढ़ रहे हैं मजदूर पर हिंदी कविता :- मजदूर पर हिंदी कविता मुट्ठी में बंद उष्णता, सपने, एहसास लिए, खुली आंखों से देखता है कोई ….. क्षितिज के उस पार। बंद आंखों से रचता है इंद्रधनुषी ख्वाबों का संसार। झाड़ता है सपनों पर उग आए कैक्टस और बबूल…. रोपता है सुंदर फूलों के पौधे बार …

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हिंदी कविता काल ने तांडव रचा | Kaal Ne Tandav Rachaa

हिंदी कविता काल ने तांडव रचा

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता काल ने तांडव रचा :- हिंदी कविता काल ने तांडव रचा काल ने तांडव रचा.. जीना मुश्किल हुआ, चंद सांसें भी लेना दुश्वार हुआ.. सांसे बिकती है ..बोलो खरीदोगे? बिकता है जमीर खरीदोगे? मुनाफाखोर ले रहे मुनाफे का मजा.. उन्हें क्या मतलब!! देश पर संकट घना। बेबसी का यह …

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हिंदी कविता अनुरोध | Hindi Kavita Anurodh

Guru Mahima Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता अनुरोध :- हिंदी कविता अनुरोध तंज.. छेद देते हैं अंतर्मन… नासूर बन जाते हैं यह जहर बुझे शब्द। घुटन… तेजाब बन जला देती है संवेदनाएं । अनबोलापन…. खा जाता है रिश्तों को। अकेलापन… भयभीत करता है। तेज आवाजें सच को छुपाने में अक्षम रहती हैं। लड़ाई … किसी समस्या …

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विश्व जल दिवस पर व्यंग्य | Vishva Jal Diwas Par Vyangya

जल संरक्षण पर कविता

आप पढ़ रहे हैं विश्व जल दिवस पर व्यंग्य :- विश्व जल दिवस पर व्यंग्य जल संरक्षण स्लोगन बन कर… लटक रहा हर द्वार, नेताजी चिल्ला कर बोले.. जल बचाओ.. मेरे यार। कार्यालय में अधिवेशन है बहस बड़ी जोरदार, छत पर ऊपर टंकी भर गई… फैलता रहा जल.. घंटों हुआ बर्बाद, और नीचे… सभाएं आबाद। …

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नाराजगी पर कविता | Narazgi Par Kavita

Judai Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं नाराजगी पर कविता :- नाराजगी पर कविता जब नाराज़ हो जाती हो तुम.. बैचेन हो जाता हूं मै। तारों बिन.. उदास आसमान सा। जैसे सूर्य की लालिमा पर मंडराया हो काला बादल। जैसे काली कजरारी आंखों से बह निकला हो काजल। जैसे भरभरा के फट पड़ा हो बादल..। वह प्यारी सुबकियां …

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आंसू पर कविता – बूंद | Aansu Par Kavita

हंसना भूल न जाओ

आप पढ़ रहे हैं आंसू पर कविता – बूंद आंसू पर कविता बूंद हूं मैं एक खारी, छलकी.. हो चक्षु से भारी, बहकी बन सुख- दुख की मारी, बूंद हूं मैं एक खारी..। मन, हृदय सब गम से भारी… कर गया आंखों को हारी, बोझ सारा मैं समेटे, चल पड़ी.. हो मैं दीवानी। बूंद हूं …

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हिंदी कविता साहित्यकार | Hindi Kavita Sahityakar

हिंदी कविता साहित्यकार

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता साहित्यकार हिंदी कविता साहित्यकार कितना कुछ जानते हो तुम साहित्यकार! कदमों की चाल से नाप लेते हो थकान.. भांप लेते हुए आंखों की कोर में. .. सफाई से छुपाया गया एक रेगिस्तान। पहचान लेते हो बदलते मिजाज की कड़वाहट.. बदल जाते हो उसी क्षण अचानक..। महसूस कर लेते हो …

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