आप पढ़ रहे हैं कविता हंसना भूल न जाओ :-

हंसना भूल न जाओ

हंसना भूल न जाओ

तल्ख सी है..फिजाएं कुछ,
अजब सी बेमियाजी़ है।
ज़ायका गुम हुआ कुछ यूं,
कि हर शय में खराबी है।

नमी आंखों में दिखती है,
हृदय भी ग़म से भारी है।
उदासी का है यह आलम,
जुबां शब्दों से ख़ाली है।

उदासी पालो न इतनी,
कि हंसना भूल ही जाओ।
आईना सामने लेकिन..
संवरना भूल ही जाओ।

चलो कुछ गुनगुना लो तुम
कि गाना भूल न जाओ।
मुस्कुराहट थोड़ी सी तो हो
कही हंसना ..भूल न जाओ!

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रचनाकार का परिचय

निमिषा सिंघल

नाम : निमिषा सिंघल
शिक्षा : एमएससी, बी.एड,एम.फिल, प्रवीण (शास्त्रीय संगीत)
निवास: 46, लाजपत कुंज-1, आगरा

निमिषा जी का एक कविता संग्रह, व अनेक सांझा काव्य संग्रहों में रचनाएं प्रकाशित हैं। इसके साथ ही अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं की वेबसाइट पर कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं।

उनकी रचनाओं के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है जिनमे अमृता प्रीतम स्मृति कवयित्री सम्मान, बागेश्वरी साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान सहित कई अन्य पुरुस्कार भी हैं।

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