हिंदी कविता अपेक्षा और उपेक्षा | Apeksha Aur Upeksha

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हिंदी कविता अपेक्षा और उपेक्षा

हिंदी कविता अपेक्षा और उपेक्षा

अपेक्षाएं पांव फैलाती हैं…
जमाती हैं अधिकार,
दुखों की जननी का हैं एक अनोखा…. संसार।

जब नहीं प्राप्त कर पाती सम्मान,
बढ़ जाता है क्रोध…
आरम्पार,
दुख कहकर नहीं आता..
बस आ जाता है पांव पसार।

उलझी हुई रस्सी सी अपेक्षाएं खुद में उलझ..
सिरा गुमा देती हैं।

भरी नहीं इच्छाओं की गगरी….
तो मुंह को आने लगता है दम।

भरने लगी गगरी…
उपेक्षाओं के पत्थरों से,
जल्दी ही भर भी गईं..
पर रिक्तता बाकी रही…।

मन का भी हाल कुछ ऐसा ही है
स्नेह की नम मिट्टी.. पूर्णता बनाए रखती हैं,

उपेक्षाएं रिक्त स्थान छोड़ जाती हैं।


रचनाकार का परिचय

निमिषा सिंघल

नाम : निमिषा सिंघल
शिक्षा : एमएससी, बी.एड,एम.फिल, प्रवीण (शास्त्रीय संगीत)
निवास: 46, लाजपत कुंज-1, आगरा

निमिषा जी का एक कविता संग्रह, व अनेक सांझा काव्य संग्रहों में रचनाएं प्रकाशित हैं। इसके साथ ही अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं की वेबसाइट पर कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं।

उनकी रचनाओं के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है जिनमे अमृता प्रीतम स्मृति कवयित्री सम्मान, बागेश्वरी साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान सहित कई अन्य पुरुस्कार भी हैं।

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