एसिड अटैक पर कविता | Acid Attack Par Kavita

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एसिड अटैक पर कविता

एसिड अटैक पर कविता

क्यों किया तुमने ऐसा?
झुलस गया मेरा चेहरा,
तड़प उठी में राहों में..
फुल सा तन कुम्हला ही गया।

सुंदरता दागी कर दी..
मेरी बर्बादी कर दी,
कोसती हूं अब हर वो घड़ी..
वहशी जब तेरी नजर पड़ी।

नादां थी खुशहाल थी मैं..
चाल से तेरी अनजान थी मैं,
मां बाबा की चिड़िया थी..
भैया कि मैं गुड़िया थी।।

खुशियां सारी लील गया..
जीने से मुख मोड़ गया ,
समझ के सुंदर खिलौना मुझे,
अंदर तक से तोड़ गया।

मौका पाकर घेर लिया..
तेजाब मुझ पर उड़ेल दिया,
चीख उठी में झुलस गई..
धरती पर में बिखर गयी।

दर्द दिया जीवन भर का..
नर्क से बदतर समय किया,
हंसी तेरी नश्तर सी थी..
छलनी -छलनी जिगर किया।

आईने में देखा खुद को जब..
पलट के फिर न देख सकी,
दहशत से में चीख उठी..
खुद को न पहचान सकी।

राक्षस हो इंसा तो नहीं..
धरती के लायक ही नहीं,
सृष्टि है इस शक्ति से..
पैदा तुम भी एक नारी से।

डूब मरो कर्मों पर तुम..
गुजरो तुम भी इस दहशत से,
आसान बहुत है तुम्हारे लिए..
तेजाब फेंकना नारी पर।

काश नियम यह आ जाए..
तेजाब फेंकने पर तुमको ,
जलती लकड़ी से दागा जाये..।

तेजाब तुम्हारे ऊपर हो..
सीने में ठंडक पड़ जाए,
झुलसी हुई आत्मा को शायद,
थोड़ा सा न्याय ऐसे मिल जाए..

थोड़ा सा न्याय मिल जाए।

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रचनाकार का परिचय

निमिषा सिंघल

नाम : निमिषा सिंघल
शिक्षा : एमएससी, बी.एड,एम.फिल, प्रवीण (शास्त्रीय संगीत)
निवास: 46, लाजपत कुंज-1, आगरा

निमिषा जी का एक कविता संग्रह, व अनेक सांझा काव्य संग्रहों में रचनाएं प्रकाशित हैं। इसके साथ ही अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं की वेबसाइट पर कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं।

उनकी रचनाओं के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है जिनमे अमृता प्रीतम स्मृति कवयित्री सम्मान, बागेश्वरी साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान सहित कई अन्य पुरुस्कार भी हैं।

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