जितेंद्र कुमार यादव

नाम – जितेंद्र कुमार यादव
धाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश
स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई
शिक्षा – स्नातक

हिन्दी कविता राष्ट्र धर्म के प्रबल प्रताप | Kavita Rashtra Dharm

Desh Bhakti Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं हिन्दी कविता राष्ट्र धर्म :- हिन्दी कविता राष्ट्र धर्म राष्ट्र धर्म के प्रबल प्रताप के हो ताप आप, भारती के मान के गुमान को बढाइये । पुण्य कर्म पाल, हे वसुंधरा के लाल ज्वाल, वीरता से युक्त स्वाभिमान को बचाइये ।। संघर्ष के उत्कर्ष से आदर्श को प्रमाण दे, उत्थान हो …

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हिंदी कविता प्रीत रीत के लिए | Hindi Kavita Preet Ke Liye

Nari Sashaktikaran Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता प्रीत रीत के लिए :- हिंदी कविता प्रीत रीत के लिए तूं है चन्द्र किरन सी प्यारी चंचल चित्त करत किलकारी देवी है या देव अवतारी प्रीत रीत के लिए तूं है रोम रोम खूबसूरत मन भावन है तेरी मूरत मुझको तेरी बहुत जरूरत प्रीत रीत के लिए तुझसे …

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कविता चाहता हूं प्यार | Kavita Chahta Hun Pyar

कविता ये मेरा हक है

कविता चाहता हूं प्यार – कभी कभी प्यार और उदारता को पूजने वाले लोग लूट लिए जाते हैं, इसलिए आवश्यक है कि प्यार को कमजोर समझने वालों के समक्ष कठोरता भी धारण किया जाए ।। कविता चाहता हूं प्यार चाहता हूं प्यार का दीदार का परिवेश हो चाहता हूं अमन चैन शांति का देश हो …

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हिंदी कविता सुन्दरता की देवी | Hindi Kavita Sundarta Ki Devi

हिंदी कविता सुन्दरता की देवी

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता सुन्दरता की देवी :- हिंदी कविता सुन्दरता की देवी सुन्दरता की देवी हो तुम, तन सुन्दर है, मन सुन्दर है। बुरा ना मानो हे सुकुमारी, तो कह दूं यौवन सुन्दर है।। मुखमंडल पे निखार ऐसा, चक्षु चौंधियांते हैं मेरे, नैनों में मदहोशी ऐसी, जैसे कोई चित्र उकेरे, सत्य कहूं …

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देवी स्तुति कविता | Devi Stuti Kavita

देवी स्तुति कविता

आप पढ़ रहे हैं देवी स्तुति कविता :- देवी स्तुति कविता शुभ्र शुचिता शुभम, श्वेत पदमासनम, सर्वगुणसम्पदम, त्वम विनय वारिधि ।। शारदे पूण्यतम, पथ पुनितम परम, मंगलम स्नेह, सुख वर्धिनी, स्वरनिधि ।। विंध्य गिरी ऊर्ध्व शोभित, भुवन वंदिनी, कृष्ण कुल हित जनित, सन्त सुख स्वासुधि ।। मधु पुहुप पोषितम, रक्षितम अम्ब त्वम, इप्सितम, मम हितम …

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हरि सिंह नलवा पर कविता | Poem On Hari Singh Nalwa

हरि सिंह नलवा पर कविता

हरि सिंह नलवा पर कविता – महाराजा रणजीत सिंह के शासन काल मे मुहम्मद शाह नाम के अफगानी लुटेरे ने भारत पर चढ़ाई की, और उसका प्रतिरोध करने के लिए महाराजा रणजीत सिंह के महान योद्धा हरीसिंह नलवा ने कुशल नेतृत्व के साथ लड़ाई लड़ी। उनकी इसी वीरता को समर्पित है ” हरि सिंह नलवा …

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आया होली का त्योहार कविता | Kavita Aya Holi Ka Tyohar

आया होली का त्योहार

आप पढ़ रहे हैं कविता आया होली का त्योहार :- आया होली का त्योहार आया होली का त्योहार, लाया खुशियों का अंबार, प्रफुल्लित हो पूरा परिवार मजा आ जाएगा ।। तो कुछ हों रंग गुलाबी लाल, गाल पे रंग दूं तेरे गुलाल, ये मौका मिल जाए हर साल मज़ा आ जाएगा ।। फागुन मस्ती का …

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रोटी पर कविता :- खानी है रोटी | Roti Par Kavita

हिंदी कविता - रोटी

इन्सान मेहनत करता है कि उसे सुकून से दो वक़्त की रोटी मिल सके। रोटी के कारण ही सारी दुनिया कुछ न कुछ काम करती है। लेकिन क्या होता है जब इन्सान की भूख सिर्फ रोटी तक ही नहीं रह जाती। बल्कि वो और भी कई चीजों की चाहत रखता है। आइये पढ़ते हैं ( …

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बदलाव के लिए प्रेरित करती कविता :- आगे बढ़कर लड़ना होगा

Motivational Kavita

बदलाव के लिए प्रेरित करती कविता ” आगे बढ़कर लड़ना होगा ” :- बदलाव के लिए प्रेरित करती कविता चुनौतियों को छिन्न भिन्न कर, उर्ध्व शिखर पर चढ़ना होगा आगे बढ़कर लड़ना होगा ।। शत्रु नित्य ललकार रहा हो, सिर पे जूते मार रहा हो, देश धर्म को आतंकित कर, विषधर बन फुफकार रहा हो, …

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भीष्म पितामह की कविता :- कहो धर्म से युद्ध लड़ूं

भीष्म पितामह की कविता

भीष्म पितामह की कविता :- महाभारत आरंभ होने से पहले भीष्म पितामह वर्तमान भूत और भविष्य के दृश्य का आकलन करते हुए गहन विचार मंथन कर रहे हैं कि वे किस ओर से युद्ध लड़ें। वो धर्म का साथ निभाएं या अधर्म का। किसका युद्ध जीतना ज्यादा आवश्यक है, किसके जीतने से धर्म की विजय …

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उत्साहवर्धक कविता :- पथिकों का पथ करूँ प्रकाशित

Motivational Poem For Students

अपने जीवन को दूसरों की सेवा के प्रति समर्पित करना ही एक इन्सान का धर्म होना चाहिए। प्रस्तुत है इसी के लिए उत्साहित करती उत्साहवर्धक कविता ” पथिकों का पथ करूँ प्रकाशित ” :- उत्साहवर्धक कविता मैं दीवाली के दीपक के दीपशिखा का द्योतक हूँ ! पथिकों का पथ करूँ प्रकाशित अंधेरों का शोषक हूँ …

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संस्था पर कविता :- आओ इस संस्था को आगे बढ़ाएं

संस्था पर कविता

कभी कभी हम जिस भी  संस्था के लिए काम करते हैं। तो ऐसा भी समय आता है जब संस्था से जुड़े लोगों को प्रेरणा की जरूरत पड़ती है या फिर संस्था  का गुणगान करना होता है तब आप यह कविता सुना सकते हैं। “संस्था” शब्द के जगह पे अपनी संस्था का नाम रख के इस …

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