देवी स्तुति कविता | Devi Stuti Kavita

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देवी स्तुति कविता

देवी स्तुति कविता

शुभ्र शुचिता शुभम, श्वेत पदमासनम,
सर्वगुणसम्पदम, त्वम विनय वारिधि ।।
शारदे पूण्यतम, पथ पुनितम परम,
मंगलम स्नेह, सुख वर्धिनी, स्वरनिधि ।।
विंध्य गिरी ऊर्ध्व शोभित, भुवन वंदिनी,
कृष्ण कुल हित जनित, सन्त सुख स्वासुधि ।।
मधु पुहुप पोषितम, रक्षितम अम्ब त्वम,
इप्सितम, मम हितम वर दे मां सुहृदि ।।

श्री चरण, दे शरण, कष्ट का कर क्षरण,
आचरण में अमित आभा भर स्वामिनी ।।
घोर कल्मष, तमस मुक्त कर दे भुवन ,
दीप्ति भर, नित प्रभा अब मिटा यामिनी ।।
श्री हरि प्रिय चरण, एक त्वम अद्भुतम,
मातृ ममतामयी, सृष्टि संस्थापिनी ।।
कोटि कोटिक नमन, प्रार्थना युक्त मन,
आस्था, अवतरित कर परम पावनी ।।

श्री रमा, सुन्दरम स्वामी हिय सुख प्रदम,
विश्वरूपम, स्वरूपम, श्री अर्धांगिनी ।।
शक्ति संवर्धिनी, श्रेष्ठ गुण संगिनी,
ज्ञान योगम परम, स्वर सुगम रागिनी ।।
सूक्ष्मतम विद्यतम, दीर्घतम शोभितम,
सर्व धर्मानमूलम, भजामि श्रुतम ।।
क्लेश कलि मल हरण, श्री चरण वन्दनम,
नित नमामि नमामि नमामि पदम ।।

विन्ध्य गिरी वंदितम, भक्ति प्रद सेवितम,
अम्ब पद पूजितम, संत हृदयेश्वरी ।।
खण्डपीठासीनम, मृदु अमिय भाषितम,
सुख वरं, दुख हरं, मातृ भुवनेश्वरी ।।
दुर्गतोद्धारिणी, कंस यश घातिनी,
भ्रातृ संरक्षिणी, भगिनि नंदेश्वरी ।।
भक्त वात्सल्य रत, सन्त उपकारिणी,
हरि भजामि, सुखद वृन्द विन्ध्येश्वरी ।।

सप्त द्वीपम धरा, रत्न मणि भुषणं,
शैल शिखरोद्भवती, सिन्धु सलिलं प्रिये ।।
रुज सुलभ भेषजं, सोम गुण पादपं,
श्वांस प्राणानिलं, सृष्टि पलितं हिये ।।
हिंदुकुश उत्तरम, हिमगिरी रक्षितम,
दक्षिणम जल जलधि, धौति पद अम्बुजम ।।
राम कृष्णम कुलं पल्लवित स्थले,
आरती, भारती भाल हो नित शुभम ।।

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रचनाकार का परिचय

जितेंद्र कुमार यादव

नाम – जितेंद्र कुमार यादव

धाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश

स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई
शिक्षा – स्नातक

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