जलियांवाला बाग पर कविता :- भारत माँ के चरणों में | Jallianwala Bagh Par Kavita

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हत्याकांड से आहत जलियांवाला बागकैसे अपना दर्द बयां कर रहा है पढ़िए जलियांवाला बाग पर कविता :-

जलियांवाला बाग पर कविता

जलियांवाला बाग पर कविता

लाख जनों के हृदयों में,सुलग रही एक आग हूँ।
भारत माँ के चरणों में मै,जलता हुवा चिराग हूँ।
निर्दोषों के रक्त से लथ-पथ,जिसकी निर्मम गोद है,
हाँ-हाँ-हाँ मैं वही अभागा,जलियांवाला बाग हूँ।

गुंजित है चहुँओर धरा पर,मै एक विप्लब राग हूँ।
दबे मेरी छाती पर अनगिन,शहीदों का मैं त्याग हूँ।
प्रतिशोध में अग्निशिखा,दृगों में धधक रही जिसकी,
हाँ-हाँ-हाँ मैं वही अभागा,जलियांवाला बाग हूँ।

अपनी माँ-बेटी,बहुओं का,उजड़ा हुवा सुहाग हूँ।
ब्रिटिश हुकूमत के रौंदे उन वंशों का भी पराग हूँ।
वर्षों से ग्लानि में डूबा,जिसका कण-कण प्राण है,
हाँ-हाँ-हाँ मैं वही अभागा,जलियांवाला बाग हूँ।

हर पंचांगों में उल्लेखित,उस काले दिन का दाग हूँ।
नर मुंडों की मृत्यु सैय्या पर,विचित्र सा बैठा नाग हूँ।
पश्चाताप की प्रखर अग्नि में,कबसे सुलग रहा जो,
हाँ-हाँ-हाँ मैं वही अभागा,जलियांवाला बाग हूँ।

निर्ममता से की हत्याओं,का साक्षी भूभाग हूँ।
लहू से सनी हुई मिट्टी में,जीवंत क्रांति सुराग हूँ।
आतंकी पीड़ा से किंचित,मुक्त भी न हुआ जो,
हाँ-हाँ-हाँ मैं वही अभागा,जलियांवाला बाग हूँ।

आजादी के शंखनाद का,मैं ही अधूरा ख्वाब हूँ।
जान लुटाई जिस खातिर थी,हाँ मैं वही स्वराज हूँ।
षडयंत्रों से फिरंगियों के,दुष्परिणाम मिला जिसे,
हाँ-हाँ-हाँ मैं वही अभागा,जलियांवाला बाग हूँ।

भारतीय इतिहास का मैं,अविस्मरणीय अध्याय हूँ।
अंग्रेजों की कूटनीति का,मैं ही कलंकित साज हूँ।
सहस्त्र लाशें दफन हुई हैं,जिस हतभागी कोख में,
हाँ-हाँ-हाँ मैं वही अभागा,जलियांवाला बाग हूँ।

आजादी के हवन कुंड में,आहुतियों का राज हूँ।
भारत माँ की तीव्र वेदना, की मै भी आवाज हूँ।
ग्रहण दोष बैशाखी के दिन,कुन्डली में लगा जिसकी,
हाँ-हाँ-हाँ मैं वही अभागा,जलियांवाला बाग हूँ।

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मेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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