गरीबी पर कविता – ये गरीबी है | Garibi Par Kavita

+6

गरीबी गरीब को किसी श्राप से कम नहीं लगती। ये एक ऐसी स्थिति होती है जहाँ इन्सान सपने तो संजो सकता है लेकिन उन्हें पूरा नहींकर सकता। क्या होती है गरीब की व्यथा गरीबी में आइये जानते हैं ” गरीबी पर कविता ” ( Short Poem On Garibi In Hindi ) के माध्यम से

गरीबी पर कविता
गरीबी पर कविता

ग़रीबी भी क्या गजब होती है,
बड़ी बेदर्द बेदिल हाय होती है।
सूख जाते हैं आंसू भीआंखों में,
आंखें बस सूखे ही सूखे रोती है।

कोई घटाता है पेट जिम जाकर,
यहां पीठ से ही चिपकी जाती है।
किसी के घर सजी सोने की ईंट,
कहीं दोजून रोटी भी नहीं होती है।

कोई महलों में पलते हैं रईशी में,
उनकी जिंदगी शानदार होती है।
कोई फुटपाथों पे पलते गरीबी में,
जिन्दगी भी बदहाल हाय होती है।

पलते किसी के कुत्ते भी एसी में,
किसी के छत भी नहीं होती है।
कोई पहनता है वस्त्र लाखों का ,
कोई तन ढकने को भी रोती है।

ये गरीबी है जालिम बेदर्द बड़ी,
इंसान की पहचान छीन लेती है।
झुक जाता है दूजे के ‌सामने सिर,
खता तो भूखे पेट की ही होती है।

बच्चे तरसते हैं किताबों के लिए,
उनका बचपन भी छीन लेती है।
देवी है नारायणी नारी जगमाता,
वही मजबूरी में बिकती रोती है।

कोई इलाज को भी तरस जाता है,
किसी की हर रोज जांच होती है।
ये गरीबी है जालिम बेदर्द बड़ी ‌,
दुखों के बादल सी छायी रहती है।

कष्टों के आंधियों तूफानों में यह,
खुशियों को ही बहा ले जाती है।
भूल जाते हैं लोग सुख की आस,
ये गरीबी दुखों से सजी होती है।

पढ़िए :- हिंदी कविता “मैं मजदूर की बेटी हूँ”


परिचय —

नाम –डॉ.सरला सिंह
माता का नाम–श्रीमति कैलाश देवी
पिता का नाम—-स्व. श्री बासुदेव सिंह
पति/पत्नि का नाम—श्री राजेश्वर सिंह
जन्मतिथि — चार अप्रैल


“ गरीबी पर छोटी कविता ” ( Garibi Par Kavita In Hindi ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

 

 

+6

Leave a Reply