स्त्री पर हिंदी कविता :- स्त्रियों ने रोपा है बीज | Stree Par Kavita

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स्त्री पर हिंदी कविता

स्त्री पर हिंदी कविता

सुनो!
कुछ स्त्रियों ने रोपा है बीज…. हंसी का,
उदासी की खाद में अश्कों की नमी मिला…
गाड़ दिया है धरती में सदा के लिए।

खुलकर हंसने के लिए उन्होंने …..
चुना है यह रास्ता…. ‌
क्योंकि रोना मना है उन्हें।

उनके उदास चेहरे से
उदास हो जाता है घर, घर की दीवारें तक‌।

चुप्पी, मौन जो असहनीय हो जाता है
भारी कर जाता है मन….।
इसलिए रो नहीं सकती कुछ स्त्रियां।

कुछ स्त्रियों ने रोंपे हैं कांटे भी…
जो चुभते रहते हैं हर किसी को,
घाव दे जाते हैं अक्सर जो….‌

पर दुखी नहीं है ऐसी स्त्रियां.. ‌
अट्ठाहास कर छीन लेती चैन और सुकून सभी का।

तीखे तंज, जहर बुझे शब्दों की बौछार…
यही है इनका हथियार।

कुछ मूर्ति सदृश्य!
परिस्थितियों ने मूक कर दिया है जिन्हें.. ‌
नहीं दिखाना चाहती जो मन के घाव….
छुपाये रखती हैं सबसे।

स्वचालित कठपुतली बन घूमती रहती हैं घर में . ‌. ‌
यहां वहां.. काम निपटाते रोबोट की तरह।

ऐसी स्त्रियों में संवेदनाएं है नहीं
या मर गई है?
किसी हद तक!

कुछ स्त्रियां काठ की तरह होती है,
बाहर से शांत अंदर से सुलगती चिंता जैसी।

पहले खुद जलती हैं
जब असहनीय हो जाती है जलन. ‌. ‌
तो आग बन बरस उठती हैं।

जैसे अंगीठी में कोयले सुलगते -सुलगते….
धीरे-धीरे आग पकड़ते हैं।

फिर इस कदर आग
कि सिर्फ एक तंज ….
और धधकते ज्वालामुखी की तरह
उलट देती हैं लावा बाहर ।

और कुछ…..
इंद्रधनुषी रंग आंखों में समाए…
बुनती रहती हैं ताना-बाना,
अपने प्रयासों और उड़ानों का।

अपनी उदासियों को बदल देती है रंगों में,
हार को जीत मे,
ऐसी स्त्रियां आखिर चुन ही लेती हैं
एक दिनअपना पसंदीदा आसमां।


रचनाकार का परिचय

निमिषा सिंघल

नाम : निमिषा सिंघल
शिक्षा : एमएससी, बी.एड,एम.फिल, प्रवीण (शास्त्रीय संगीत)
निवास: 46, लाजपत कुंज-1, आगरा

निमिषा जी का एक कविता संग्रह, व अनेक सांझा काव्य संग्रहों में रचनाएं प्रकाशित हैं। इसके साथ ही अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं की वेबसाइट पर कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं।

उनकी रचनाओं के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है जिनमे अमृता प्रीतम स्मृति कवयित्री सम्मान, बागेश्वरी साहित्य सम्मान, सुमित्रानंदन पंत स्मृति सम्मान सहित कई अन्य पुरुस्कार भी हैं।

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