माँ की याद कविता :- माँ तुम बहुत याद आती हो | Maa Ki Yaad

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माँ की याद कविता

माँ की याद कविता

तू ममता की मूरत,
तू करुणा की सागर है,
तेरे बिन ये सब जग सूना,
तेरे बिन परिवार अधूरा,
तू हमेशा हंसती थी माँ,
हम सब को भी हंसाती थी,
पर अब तुम बहुत रुलाती हो
माँ तुम बहुत याद आती हो।

ऊंगली पकड़ कर चलना सिखाया,
जब भी गिरा माँ तुम ने ही उठाया,
यूँ लगता है तुम हम अब भी
हमेशा प्यार बरसाती हो,
माँ तुम बहुत याद आती हो।

खुद से ज्यादा हमें मानती,
चलना हमें सीखाती माँ,
भटके जो कभी राहों में
मंजिल हमें दिखाती माँ,
हमारी गलतियाँ अब तुम
हमको क्यों नहीं बताती हो?
माँ तुम बहुत याद आती हो।

खाना हमें खिलाती थी माँ,
लोरी गाकर सुलाती थी,
अब क्यों ना थपकी देकर
हमको तुम सुलाती हो
माँ तुम बहुत याद आती हो।

मेरे जगने से पहले तुम
स्वयं जाग जाती थी,
मेरी हर जरुरतों को
बिना बताए जान जाती थी,
आज भी ये घर
तुम ही तो स्वर्ग बनाती हो,
माँ बहुत याद तुम आती हो।


प्रकाश रंजन मिश्रनाम :- प्रकाश रंजन मिश्र
पिता :- श्री राज कुमारमिश्र
माता :- श्रीमती मणी देवी
जन्मतिथि :- 05/05/1996
पद-: सहायकप्राध्यापक, वेद-विभाग(अ.), राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान जयपुर परिसर, जयपुर (राजस्थान)
अध्यायन स्थल-: श्रीसोमनाथसंस्कृतविश्वविद्यालय,वेरावल, (गुजरात)
आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान वेद विद्यालय मोतिहारी (बिहार)
वेद विभूषण वेदाचार्य(M.A), नेट, गुजरात सेट, लब्धस्वर्णपदक, विद्यावारिधि(ph.d) प्रवेश
डिप्लोमा कोर्स :- योग, संस्कृतशिक्षण,मन्दिरव्यवस्थापन,कम्प्युटर एप्लिकेशन।
प्रकाशन :- 7 पुस्तक एवं 15 शोधपत्र,10 कविता
सम्मान :- ज्योतिष रत्न, श्री अर्जुन तिवारी संस्कृत साहित्य पुरस्कार से सम्मानित

स्थायीपता :- ग्राम व पोस्ट – डुमरा, थाना -कोटवा ,जिला- पूर्वी चंपारण (बिहार)

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