हिंदी कविता खुद को पहचानो | Kavita Khud Ko Pahchano

आप पढ़ रहे हैं हरीश चमोली जी द्वारा रचित ( Hindi Kavita Khud Ko Pahchano ) हिंदी कविता खुद को पहचानो :- हिंदी कविता खुद को पहचानो दिल में छिपी तमस को तुम, खुद से जरा हटाकर तो देखो। फितूर अपने मस्तिष्क का, पुष्प सा महकाकर तो देखो। जीवनदाता परमेश्वर…

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हिंदी कविता मुसाफिर हूँ मैं यारों | Musafir Hun Main Yaaron

हिंदी कविता मुसाफिर हूँ मैं यारों न जाने आज मैंकिस ओर चल रहा हूँ।अनजानी राहों मेंगिरने से सँभल रहा हूँ।कदम डगमगा रहे राह में,फिर भी सीना तान खड़ा हूँ। मुसाफिर हूँ मैं यारोंलक्ष्य ढूंढने चल पड़ा हूँ।   जैसी भी बाधाएं आएंमैं उनके मुताबिक ढल रहा हूँ।  हार जीत कुछ…

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देश भक्ति दोहे सैनिकों पर | Desh Bhakti Dohe Sainiko Par

देश भक्ति दोहे सैनिकों पर हर कतरा निज देह का,कर देते हैं दान। रक्तिम बूंदों से लिखा,तन पर हिंदुस्तान। दुश्मन का हो अंत ये, है बस मेरा काम। भारत माँ की जय करूँ, और जपूँ श्री राम।। देशभक्ति करता रहूँ, जन्म-जन्म सौ बार। मौत मिले जो इस जन्म, पुनः लूँ…

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गौरैया पर कविता :- प्यारी गौरैया | Beautiful Sparrow Poem In Hindi

Sparrow Poem In Hindi आप पढ़ रहे हैं गौरैया पर कविता " प्यारी गौरैया " :- Sparrow Poem In Hindiगौरैया पर कविता ओ मेरी प्यारी गौरैया,तुम हमसे रूठ ना जाओ!ओ मेरी सोनचिरैयातुम हमसे दूर ना जाओ, बस मेरी इतनी है विनतीअब तो घर आ भी जाओ,ओ मेरी नन्ही चिड़ियातुम घर लौट आओ! उषा की…

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पर्यावरण पर कविता इन हिंदी :- मूक पेड़ बोल नहीं सकते हैं

पर्यावरण पर कविता इन हिंदी मूक पेड़ बोल नहीं सकते हैं परन्तु दर्द उनका महसूस करो। तुम एक नन्हा सा वृक्ष लगाकर जीवन में खुशी की किरण भरो।। दुखद जीवन से पतझड़ को तुम वृक्ष लगाकर बनाओ सावन। चीख चीख कर पुकार रही तुम्हे वृक्षों से भरो धरती का आंगन।।…

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कविता पर्यावरण पर :- कहीं खो गया | Kavita Paryavaran Par

कविता पर्यावरण पर वसुधा का वह सुनहरा दृश्य न जाने कहां लुप्त हो गया। प्रकृति का मोहक सा नजारा वृक्ष काटने से कहीं खो गया।। सूखे हुए पेड़ों के निराश तने आंसू बहा रहे हैं पतझड़ के। सलिल नहीं मिलने के कारण सूख रहे जीवन वृक्ष जड़ के।। वृक्ष काटने…

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ग़ज़ल तर्क वितर्क | Ghazal Tark Vitark

ग़ज़ल तर्क वितर्क मुश्क़िलों को समझें तर्क - वितर्क करें , मज़हबों में नहीं सोच में फ़र्क़ करें। कोहिनूर भी किसी ने चुरा लिया था , कमाई दौलत को समझकर ख़र्च करें। मंज़िलें , क़ामयाबी भी तब ही मिलेगी , चलने से पहले अपना इरादा ज़र्फ़ करें। पर जहाँ पर…

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नारी पर कविता | Nari Par Kavita In Hindi | Poem On Woman

Nari Par Kavita In Hindi आप पढ़ रहे हैं नारी पर कविता :- Nari Par Kavita In Hindiनारी पर कविता मन में विश्वास हैहे नारी तू महान हैमां, बहन, बेटी,पत्नी के रूप में हो तुम सजती । तो देवी बन मां सरस्वती ,लक्ष्मी ,दुर्गा और काली के रूप में ,सर्वत्र पूजी जाती । हे…

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विश्व पर्यावरण दिवस पर हिंदी कविता | 5 जून पर विशेष कविता

विश्व पर्यावरण दिवस पर हिंदी कविता धरती की हरियाली को तूने लूटा है, बताओ कितने जंगल को तूने काटा हैं! वनो में अब न गुलमोर न गूलर खड़ी है, हरी- भरी धरती हमारी बंजर पड़ी है! क्या खाओगे बोलो और क्या साँस लोगे! अगर ये जंगल नहीं रहेगा तो तुम…

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पति पत्नी प्रेम कविता | Pati Patni Prem Kavita

लॉकडाउन के बाद पति से मिलने पर पत्नी की भावनाओं पर लिखी गयी ( Pati Patni Prem Kavita ) पति पत्नी प्रेम कविता "साथ चलेंगे कदम कदम " पति पत्नी प्रेम कविता बड़े दिनों के बाद, मैं आई हूँ आपके पास संग मोरे झूमे सारी धरती और सारा आकाश। मैं…

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ऋतुओं पर कविता | Rituon Par Hindi Kavita

आप पढ़ रहे हैं ऋतुओं पर कविता :- ऋतुओं पर कविता जीवन का हर एक क्षण नहीं होता है एक समान। कभी होता है हरा भरा कभी होता है रेगिस्तान।। प्रकृति भी अपने मौसम समय के बाद बदलती हैं। जब सर्दी आती जीवन में मानव की एक न चलती है।।…

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कन्या भ्रूण हत्या पर कविता | Kanya Bhrun Hatya Par Sad Kavita

आप पढ़ रहे हैं कन्या भ्रूण हत्या पर कविता :- कन्या भ्रूण हत्या पर कविता माँ मुझे भी जीने की लालसा है!मेरी भी कुछ अभिलाषा है! मैं भी नभ के तारे बन चाहती हूँ दमकना!मैं भी सूरज बन नभ में चाहती हूँ चमकना! मुक्तगगन में पंख लगाकर उड़ना चाहती हूँ!माँ…

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