हिंदी कविता खुद को पहचानो | Kavita Khud Ko Pahchano
आप पढ़ रहे हैं हरीश चमोली जी द्वारा रचित ( Hindi Kavita Khud Ko Pahchano ) हिंदी कविता खुद को पहचानो :- हिंदी कविता खुद को पहचानो दिल में छिपी तमस को तुम, खुद से जरा हटाकर तो देखो। फितूर अपने मस्तिष्क का, पुष्प सा महकाकर तो देखो। जीवनदाता परमेश्वर…

