नारी पर कविता | Nari Par Kavita In Hindi | Poem On Woman

Nari Par Kavita In Hindi आप पढ़ रहे हैं नारी पर कविता :-

Nari Par Kavita In Hindi
नारी पर कविता

नारी पर कविता

मन में विश्वास है
हे नारी तू महान है
मां, बहन, बेटी,
पत्नी के रूप में हो तुम सजती ।

तो देवी बन मां सरस्वती ,लक्ष्मी ,
दुर्गा और काली के रूप में ,
सर्वत्र पूजी जाती ।

हे नारी तू महान है….
बेटी बन मां-बाप का मान रखती,
तो बहु बन सास – ससुर का सम्मान करती ।

मां बन बच्चों को शिक्षा देती ,
तो पत्नी बन सुख – दुःख की सहभागीनी बनती ।
हे नारी तू महान है..
घर का कर्तव्य निभा कर भी,
तुम चुप हो रहती।

तो बच्चों की किलकारी से,
तुम हरपल खुश रहती ।
घर -परिवार की डांट ,
भी तू हंस कर सह लेती।
तो अपने परिवार की खुशी के लिए
अपने सारे सपनों को कुर्बान करती।

तूफानों से टकराकर ,
सब पे हो तुम प्यार लुटाती।
है नारी इसलिए तू महान कहलाती।


अनुसिया करनानी

यह कविता हमें भेजी है अनुसिया करनानी जी ने सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) से। ये अपने शब्दों के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाना चाहती है। लिखने मे इनकी की रुचि है इनका कहना है हम बदलेंगे तो जरूर समाज राष्ट्र और देश बदलेगा।

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