गौरैया पर कविता :- ओ मेरी प्यारी गौरैया | Sparrow Poem In Hindi

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गौरैया पर कविता

गौरैया पर कविता

ओ मेरी प्यारी गौरैया,
तुम हमसे रूठ ना जाओ!
ओ मेरी सोनचिरैया
तुम हमसे दूर ना जाओ,

बस मेरी इतनी है विनती
अब तो घर आ भी जाओ,
ओ मेरी नन्ही चिड़िया
तुम घर लौट आओ!

उषा की लाली जब निकली थी,
आकर द्वार- द्वार पर तुम रोज फुदकती थी,
अब तू कहाँ उड़ चली,
ना जाने किस गली!

उछल कुद मचाने वाली,
घर आँगन में फुदकने वाली,
छत छप्पर में थिरकने वाली,
तू कहाँ उड़ चली,

तुम बिन ज्येष्ठ दुपहरी जैसे
ये गलियाँ ये चौराहा विरान पड़े हैं,
तुम बिन ये घर आँगन ये चबुतरा
सब सुनसान पड़े है,

फिर तुम मेरे खपरैल घर के
प्रागंण में मँडराओ,
फिर तुम मेरे मटमैले आँगन में
आ भी जाओ!

कभी घरों पे छतों में
चढ़कर तुम्हें देखती हूँ!
तो कभी तुम्हारी
आहटों को खोजती हूँ,

अब तुम बिन
आँगन में सूनापन है,
अब तुम बिन
मन में भी खालीपन है!

ओ मेरी गौरैया
फिर याद आ रही है तुम्हारी चहचाहट,
मेरे घर द्वार पर नहीं है
अब कोई तुम्हारी आहट,

फिर मेरे आँगन में फुदक- फुदककर
अपनी चहचाहट सुनाओ,
चुँ-चुँ चहचाहते हुए तुम
अपने पर फड़फड़ाते आओ!

तुम भी दादी-नानी की
कहानी मत बन जाना,
कोई भूली बिसरी
जुबानी मत बन जाना,

ओ मेरी प्यारी गौरैया
तुम घर लौट आओ,
सुन री गौरैया
फिर उड़कर द्वार पर आ जाओ!

मेरे घर की दिवार में लटकी
आईने में अपनी प्रतिबिम्ब देखने आओ,
सुबह- सुबह अतिथि बन तुम
अपना सुन्दर रूप निहारने आओ,

ये आँगन ये खिड़खी फिर तुम्हें पुकारे
अब आ भी जाओ,
ओ मेरी प्यारी गौरेया
तुम घर लौट आओ,

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बिसेन कुमार यादव

यह कविता हमें भेजी है बिसेन कुमार यादव जी ने गाँव-दोन्देकला, रायपुर, छत्तीसगढ़ से।

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