शादी पर हास्य कविता :- शादी मत करना

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शादी पर हास्य कविता

शादी पर हास्य कविता

पते की बात मैं सबको बता रहा हूँ,
शादी मत करना मैं सबको चेता रहा हूँ।

शादी करके मैं अब तक पछता रहा हूँ,
इसलिए सबको अपना किस्सा सुना रहा हूँ।

जींस पहनो या पहन लो खादी,
कुछ भी हो जाए पर करना मत शादी।

जान बूझकर तुम इस बंधन में न पड़ना,
सब कुछ करना पर गठबंधन ये न करना।

मेरे साथी, मित्रों को मैं सबको यही बताऊँगा,
सभी कुंवारों को अब शादी से अवगत कराऊँगा।

शादी जेलर कैदी का मेल,
शादी खुली हुई सी जेल।

वो रेल तो हम अठ्ठारह चक्का टेलर,
हम उनके कैदी वो हमारे जेलर।

विवाह कुछ नहीं जीवन भर की गुलामी है,
हम छोटी सी, वो तो पूरी सुनामी है।

शादी का नाम आबादी है,
आज़ादी की बर्बादी है।

जब से हुई है, शादी मेरी,
जारी है बर्बादी मेरी।

सावधान, हो जाओ खतरा है,
शादी बनाती बलि का बकरा है।

पूछो मत कैसी चलती गृहस्थी,
गली जा रही मेरी अस्थि।

बज-बज कर मैं तबला हो गया,
मोटा था,अब पतला हो गया।

लूट लिया सारे चैन और सुकुन,
चूस लिया पत्नी ने मेरा खून।

खुशी भरी जिन्दगी सारी लुटी जाती है,
दोस्ती, यारी सारी मेरी छुटी जाती है।

पेट के लिए लाए कहाँ से निवाले,
अपने बच्चे को हम कैसे पाले।

बस इसी चक्कर में पुरी जिन्दगी कटी जाती है,
बच्चो की लालन,पोषण में ही जवानी ढली जाती है।

मत देना तुम शादी के लिए रजामंदी,
वरना हो जाओगे बीवी के बंदी।

नहीं छीन रहा हूँ, मैं तुम्हारी आजादी,
फिर मत कहना कैसी सजा दी।

वीरगति को प्राप्त होना चाहते हो यदी,
मत करो देर बंधु शादी कर लो जल्दी।

शादी कर जिन्दगी में जो मगन है,
उन्हें मेरा शत,-शत् बार नमन है।

शादी नेता के लिए गठबंधन है,
दर्शक के लिए मनोरंजन है।

व्यापारी के लिए व्यापार है,
किसी के लिए घर-द्वार संसार है।

हमारे लिए तो शादी आफत की पुड़िया है,
शादी नहीं हुयी तो तुम्हारे लिए समय बढ़िया है।

बीबी बनकर मदारी हमको बंदर नाच नचाती है,
अपने काम के लिए हमें बँधुआ मजदूर बनाती है।

काम आना तो सौन्दर्य प्रसाधन की वस्तुएं ले आना कहती है,
सुबह होते ही पत्नी हमारी हमको ब्यूटी पार्लर भेजती है।

बिना खाना खाए हम जल्दी-जल्दी दुकान जाते है,
वहाँ से हम मेंहदी,आईब्रो, काजल,उबटन लाते है।

न हो जाओ जीवन भर के लिए बीबी की मजदूर,
मेरा बात मानो बंधु रहो शादी से दूर।

मेरा तुमसे यही है, अर्जी,
आगे क्या है, तुम्हारा मर्जी।

पढ़िए :- नाक पर कविता | नाकों की दुनिया | Poem On Nose


बिसेन कुमार यादव

यह कविता हमें भेजी है बिसेन कुमार यादव जी ने गाँव-दोन्देकला, रायपुर, छत्तीसगढ़ से।

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