बारिश पर कविता :- सुन वर्षा रानी | Barish Par Kavita

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बारिश पर कविता

बारिश पर कविता

सुन वर्षा रानी !
तुम गिराओ पानी!!?1)

गड़ गड़ बादल गरजाओ!
चम-चम तुम चपला चमकाओ!!(2)

मेघराज में विचरण करते आओ!
संग बून्दो की बरात लाओ!!

बन- ठन सज सँवर के बलखाते आओ!
श्यामल-श्यामल ओढ़नी लहराते आओ!!

कमल -कुमुदनी करूण विलाप कर रही है!
पीक-पपीहा बुलबुल तुम्हे बुला रही है!

रवि के प्रचण्ड गर्मी से धरती धधक रही है!
अम्बर अवनी सारी धरनी ज्वाला बन जल रही है!!

झील, नदी, सरोवर सब सुखने लगी है!
पत्तियाँ, वनस्पतियाँ सब झुलसने लगी है!!

झर-झर- झर पावन- पावस नीर बरसाओ!
सुन बरखा रानी तुम बून्दो की तीर चुभाओ!!

प्यासी धरा की प्यास बुझाने आओ!
धरातल को तुम भिगाने आओ!

अषाढ़ की पहली बौछार बन के आओ!
यौवन सावन की बहार बन के आओ!

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बिसेन कुमार यादव

यह कविता हमें भेजी है बिसेन कुमार यादव जी ने गाँव-दोन्देकला, रायपुर, छत्तीसगढ़ से।

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