रिश्तों पर कविताएं ( Rishton Par Kavitayen )
माता – पिता . भाई – बहन , बेटा , चाचा – चाची , नाती – नातिन , दोस्त , प्रेमी – प्रेमिका , नाना – नानी आदि पर कविताएं
Emotional Hindi Poem on Loneliness - रात की ख़ामोशी, धुँध में ढका आसमान, और दिल में ठहर गया एक अधूरा इंतज़ार—इन्हीं एहसासों के बीच जन्म लेती है यह कविता। यह एक ऐसे दिल की दास्ताँ है जो यादों की धुंध में भटक रहा है, जिसकी हर साँस में किसी अपने…
माँ को समर्पित कविता माँ को समर्पित कविता गीत लिखुँ तुझ पर माँया लिखुँ कोई कविता,रो पड़ा हुँ देख करतेरे आँचल में ममता, तु कितनी सुंदर है माँतु कितनी प्यारी है माँ,कितना भी देखुं तुझेमन नहीं भरतामन नहीं भरता…. बनाने वाले ने तुझे माँक्या खूब बनाया है,रोम-रोम में बसी तेरेस्नेहपूर्ण…
आप पढ़ रहे हैं मित्र पर कविता :- मित्र पर कविता मित्र वही जो खुल कर बोलेहिय की बात भी मुंह पर खोलेनहीं छुपाए कोई बातदेता हर सुख दुख में साथप्यार का मधुरस दिल में घोले,मित्र वही जो खुल कर बोले। हर दुःख को वह अपना,समझेबात बड़ी हो पर ना…
आप पढ़ रहे हैं माँ बाप पर कविता - माँ बाप पर कविता लोक जन कल्याण हेतुलिख रहे जो काव्य हैं,पीढ़ियों को सीख देकरदे रहे जो ताप है, रह गया वंचित अगर जोआज के इस बात सेउसके लिए…
आप पढ़ रहे हैं परिवार पर हिंदी कविता परिवार पर हिंदी कविता अरुणोदय की आभा का विस्तार बचा लो हे भगवन।भारत मां के आंगन के परिवार बचा लो हे भगवन।। परिवार वही जो अपनेपन के भावों से हो भरा हुआ,रिश्तों का संसार जहां हो प्रेम सिंधु से घिरा हुआ,प्रेम सिंधु…
आप पढ़ रहे हैं " माँ को समर्पित कविता " :- माँ को समर्पित कविता हे! मां आकर मुझे बताओयह मुझे समझ ना आए क्यों?सब क्यों उलझा उलझा लगतायह कोई ना समझाए क्यों? पूछो पूछो पुत्र सयानेहै खीझा खीझा उलझा क्यों?कौन प्रश्न हैं इतना भारीजो नहीं अभी तक सुलझा क्यों?…
आप पढ़ रहे हैं "हिंदी कविता ममतामयी माँ " :- हिंदी कविता ममतामयी माँ (तर्ज: जिसकी प्रतिमा इतनी…..) ममतामयी माँ शरण में आयाअपनी दया दिखा देनामेरे सिर पर हाथ धरो माँज्ञान की ज्योति जगा देनाज्ञान की ज्योति जगा देना…..2 तु बिगडे़ सबके काज संवारेरोम रोम आभास तेराश्रद्धा की आवाज तुझी…
आप पढ़ रहे हैं "कविता माँ की जय जयकार ":- कविता माँ की जय जयकार बिठा के अपने मन मंदिर मेंमाँ की जय जयकार करो !फूल मिलें चाहे मिले हो कांटेसबको हंसके स्वीकार करो !! सारी दुनिया को छोड़ करहम शरण तुम्हारी आए हैं !जिसमें हो हम सबका भलावह अब…
आप पढ़ रहे हैं कविता अपने आँचल की ममता :- कविता अपने आँचल की ममता अपने आँचल की ममता मेरे सिर धरो।मैया नश्वर है तन इसको पावन करो।। आस बरसों से दिल में लगा के रखीइक दिन घर को हमारे माँ आयेगी तु,तेरी ममता की छाया मिलेगी हमेंआके बच्चों को…
कविता माँ की यादें कविता माँ की यादें मेरी उम्र बीतती जाती हैपल-पल तुझे बुलाने में!जाने कितनी यादें भरी हैतेरे इस आँचल में!! क्या सच में दूर गयी है हमसेऐसा हमको लगा नहीं,भावों को समझा निज मन केदु:ख में कभी मैं भगा नहीं,इक सुकून सा मिलता हैखुद को यूँ ही…
कविता अरदास मेरे मन की कविता अरदास मेरे मन की अरदास मेरे मन कीमाँ बेकार नहीं होगी,तु संग है तो जीवन मेंकभी हार नहीं होगी।। गमों से टूट जाऊं मैंमाँ ये हो नहीं सकता,बेटे हो गर दु:ख में तोपिता सो नहीं सकता,माँ-बाप बिन नैयाभवपार नहीं होगी,तु संग है तो जीवन…
कविता जीवन माँ का दर्पण - कविता जीवन माँ का दर्पण ये जीवन माँ का दर्पण हैबस माँ का मान बढ़ाता चल।धन दौलत यहीं पे छूटेगीसत्कर्मों की राह बनाता चल।। खुशीयों की किसी से ना जलनाअपने सपने साकार करो,गुलशन में किसी के ना खिलनाअपने पुष्पों से श्रृंगार करो,मत चढ़ना झूठ…