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हिंदी कविता ममतामयी माँ

हिंदी कविता ममतामयी माँ

(तर्ज: जिसकी प्रतिमा इतनी…..)

ममतामयी माँ शरण में आया
अपनी दया दिखा देना
मेरे सिर पर हाथ धरो माँ
ज्ञान की ज्योति जगा देना
ज्ञान की ज्योति जगा देना…..2

तु बिगडे़ सबके काज संवारे
रोम रोम आभास तेरा
श्रद्धा की आवाज तुझी से
साँस साँस में वास तेरा
साँस साँस में वास तेरा…..2
जग में ऊंचा नाम रहे माँ
ऐसी युक्ति लगा देना

मेरे सिर पर हाथ धरो माँ
ज्ञान की ज्योति जगा देना,
ज्ञान की ज्योति जगा देना…..2

मन ग्रंथों के हर पन्ने पर
तू ही शब्द सजाती है
कलम थमा के कवियों सी माँ
प्यारे गीत लिखाती है
प्यारे गीत लिखाती है…..2
चलती रहे बस मेरी लेखनी
इतना योग्य बना देना

मेरे सिर पर हाथ धरो माँ
ज्ञान की ज्योति जगा देना,
ज्ञान की ज्योति जगा देना…..2

तेरी कृपा से रोनक घर की
मुस्कानों की झड़ी लगे
तु खुशीयों से झोली भरती
तेरी भक्ति बड़ी लगे
तेरी भक्ति बड़ी लगे…..2
बैरागी कर दे जीवन को
कद सबको दिखला देना

मेरे सिर पर हाथ धरो माँ
ज्ञान की ज्योति जगा देना,
ज्ञान की ज्योति जगा देना…..2

जब जब गाँऊ भजन में तेरे
अमृत की बौछार लगे
मधुर साज भाये मन सबको
हर सपना साकार लगे
हर सपना साकार लगे…..2
कंठ बिराजो हे माँ मेरी
मीठे बोल सीखा देना

मेरे सिर पर हाथ धरो माँ
ज्ञान की ज्योति जगा देना,
ज्ञान की ज्योति जगा देना…..2

ममतामयी माँ शरण में आया
अपनी दया दिखा देना
मेरे सिर पर हाथ धरो माँ
ज्ञान की ज्योति जगा देना
ज्ञान की ज्योति जगा देना…..2

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