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Praveen Kucheria

मेरा नाम प्रवीण हैं। मैं हैदराबाद में रहता हूँ। मुझे बचपन से ही लिखने का शौक है ,मैं अपनी माँ की याद में अक्सर कुछ ना कुछ लिखता रहता हूँ ,मैं चाहूंगा कि मेरी रचनाएं सभी पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें।

कविता क्या लिखूँ | Hindi Kavita Kya Likhun

हिंदी कविता मैं लिखता रहूंगा

आप पढ़ रहे हैं ( Hindi Kavita Kya Likhun ) कविता क्या लिखूँ :- कविता क्या लिखूँ कुछ गहरा सा लिखना था, कविता से ज्यादा क्या लिखूँ ? कुछ कीर्तन सा लिखना था, आरती से ज्यादा क्या लिखूँ ? कुछ ठहरा सा लिखना था, दर्द से ज्यादा क्या लिखूँ ? कुछ अपना सा लिखना था, …

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Pita Par Kavita | पिता पर कविता :- उपकार पिता के

पिता के लिए कविता

आप पढ़ रहे हैं ( Pita Par Kavita ) पिता पर कविता :- पिता पर कविता Pita Par Kavita उपहार पिता के गिनती करना मुश्किल है, उपकार पिता के गिनती करना मुश्किल है। नश-नश में जिसका रक्त बहे रहे स्वाभिमान से भरा-भरा, नभ भी मानो छोटा लगता घर आँगन हो हरा-हरा, इज्जत, शौहरत, रुतबे का …

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माँ की याद कविता | Maa Ki Yaad Kavita

माँ की याद कविता

आप पढ़ रहे हैं ( Maa Ki Yaad Kavita ) माँ की याद कविता :- माँ की याद कविता   माँ तुम बिन क्या हाल हुआ पल-पल सदियाँ कहती है, लौट आओ तुम फिर से माँ अखियों से नदियाँ बहती है, तुम बिन कैसे जीते हैं सब इक पल ये अहसास करो, बिन तेरे घर …

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गृहिणी पर कविता :- आसान कहाँ था गृहिणी होना

गृहिणी पर कविता

घर को स्वर्ग बनाने वाली गृहिणी पर कविता :- गृहिणी पर कविता चलती कलम छोड़ झाडू घसीटना, दूध की मलाई खाना छोड़ मक्खन के लिये बचत करना, दुपट्टे से उम्र के सम्बंध जोड़ना कभी साड़ी में घसीटना। कभी चुनरी खीसकने से संभालना, किताबें छोड़, गृहस्थी पढ़ना, एक एक फुल्का गोल सेंकना सहेलियाँ छोड़, दीवारों से …

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माँ पर कुछ पंक्तियाँ :- एक तुम्हारा होना माँ

नारी शक्ति पर हिंदी कविता

माँ जब होती है तो जीवन आनंदमयी होता है। वह खुद तकलीफें सह लेती है लेकिन अपने बच्चों को हमेशा खुश रखती है और घर को स्वर्ग बना कर रखती है। इसी विषय पर प्रस्तुत हैं माँ पर कुछ पंक्तियाँ :- माँ पर कुछ पंक्तियाँ एक तुम्हारा होना माँ क्या से क्या कर देता है, …

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स्वर्गीय माँ की याद पर कविता :- मैं टूटता बहुत हूँ माँ

माँ की याद कविता

माँ के इस दुनिया से चले जाने के बाद अपने हृदय की भावना को शब्दों का रूप देती हुयी ” स्वर्गीय माँ की याद पर कविता ” स्वर्गीय माँ की याद पर कविता बदला नेचर देख देख कर मैं टूटता बहुत हूँ माँ, कहा था कस के थामे रहना मैं लड़खड़ाता बहुत हूँ माँ। हर …

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शहीद सैनिकों को समर्पित कविता :- तिरंगा फहरायेंगे | Shaheed Sainik Ke Liye Kavita

सैनिक दिवस पर विशेष कविता

सरहद पर जब हमारे जवान देश की रक्षा करते हुए शहीद होते हैं तो सिर्फ उनके ही परिवार को नहीं बल्कि पूरे देश को उसका दुःख होता है। ऐसे में एक आम व्यक्ति की भावना क्या होती है? आइये पढ़ते हैं ( Shaheed Sainik Ke Liye Kavita ) शहीद सैनिकों को समर्पित कविता ” तिरंगा …

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कविता गीत पटल के गाऊंगा | Kavita Geet Patal Ke

कविता गीत पटल के गाऊंगा

हिंदी कविता गीत पटल के गाऊंगा नाम पटल के सारा जीवन इक दिन मैं कर जाऊंगा, जब तक साँस चलेगी मेरी गीत पटल के गाऊंगा। फीकी फीकी सी लगती है चेहरे की लाली मेरी, धुंधलाया है दिन दिन में भी रातें बन गयी काली मेरी, कैसी है तकदीर ये मेरी खुशियों का कोई शोर नहीं, …

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गीत कुँवारा लिख डाला : हिंदी गीत | Geet Kunwara Likh Dala

कविताएं साथ चलती हैं

गीत कुँवारा लिख डाला क्या व्यथा कहूँ रीते घट की मरुथल पनघट भी पी डाला, मन ने कोरे कागज पर गीत कुँवारा लिख डाला। आओ पढ़ना तुम कान्हा प्रेम के ढ़ाई आखर को, विरहिणी विरह में जाग रही गागर में भर दो सागर को, हल्दी कुमकुम के रंगों का भाव है आज निराला, इनकी कलकल …

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पटल को समर्पित कविता | Patal Ko Samarpit Kavita

कविता गीत पटल के गाऊंगा

पटल को समर्पित कविता पलता आया प्राण पिंजर में हर साँस ने मेरी गाया, एक से बढ़कर एक सुर-पाँखी पटल के मन को भाया। ढ़ली साँझ बन मुरली जैसी मधुर तान का फेरा, कलरव करते ओर चहकते चहूँ और परिंदी डेरा, अक्षर-मंत्र शब्द के टोने स्वर के बाण चलाया, रचनाओं के स्नेह पंखों से पटल …

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कविता दर्द दिया तकदीर ने | Kavita Dard Diya Takdeer Ne

कविताएं साथ चलती हैं

हमारे समाज और देश में आज-कल होने वाली घटनाओं को कौन नहीं जानता? ये सब देख कर आम आदमी चाहे खामोश रहे लेकिन एक कवि कभी चुप नहीं बैठता। वो अपनी आवाज उठाता है अपनी कलम से। ऐसे ही एक ककवि की भावना है यह आज के सच पर ( Kavita Dard Diya Takdeer Ne …

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हिंदी कविता मन की खुशियाँ | Hindi Kavita Man Ki Khushiyan

फूल और कांटे कविता

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता मन की खुशियाँ :- हिंदी कविता मन की खुशियाँ मन की खुशियाँ गम लिख डाले ज्यादा नहीं तो कम लिख डाले, रजनीगंधा सी देह तुम्हारी पुष्पों सा यौवन लिख डाले। महका निखरा रूप तुम्हारा चिर-असीम आभा लिख डाले, साँसों के महके सर्पो से उन देहों को चंदन लिख डाले। …

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