बिटिया पर कविता :- वो गुड़िया | Bitiya Par Kavita
कलयुग में हो रहे घोर पापों में एक पाप बलात्कार। जिसकी बलि न जाने कितनी नारिया चढ़ गयी हैं। एक पिता जो सारी उम्र बेटियों को पलता है और उन्हें लड़कों की तरह रखता है। उसके सारे सपने चूर-चोर हो जाते हैं। जब उसके जिगर के टुकड़े कोई और रौंद…

