नशा मुक्ति पर कविता :- किस ओर ले जाना चाहता था जीवन | Nasha Mukti Par Kavita

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नशे से दूर रहने और नशा करने वालों को नशा मुक्तिके लिए प्रेरित करती नशा मुक्ति पर कविता ( Nasha Mukti Par Kavita ):- किस ओर ले जाना चाहता था जीवन

नशा मुक्ति पर कविता

नशा मुक्ति पर कविता

किस ओर ले जाना चाहता था जीवन और कहां फंसा दिया।
आनंद तो जीवन में और भी, क्यों तूने ये विषैला नशा किया।।

नशे के लिए महफ़िल सजा करती
तृष्त मन और जाम भरा करती
गिरे हुए की उठाएं तो कहां तक
होशो हवाश से अवगत जहां तक
मजा नशा का कैसा मजा है जिसमें दुनिया को ही भुला दिया
किस ओर ले जाना चाहता था जीवन और कहां फंसा दिया।

सच्चाई से वाकिफ तो है इंसान
नशारूपी हैवानियत वास करती
सच्चा बखान कर गए करने वाले
‘नशा आत्मा शरीर का नाश करती’
मदहोशी और बेहोशी में झूम कर, अन्दर असुर बसा दिया।
किस ओर ले जाना चाहता था जीवन और कहां फंसा दिया।।

नशा का कोई फायदा नहीं शरीर में
नशा केवल है, नशा कोई पोषण नहीं
जीवन का आनंद होश में रह कर ही
शरीर की हिफाजत कर, शोषण नहीं
बेखबर दुनियादारी से, तेरी इसी दुर्दशा ने जग को हंसा दिया।
किस ओर ले जाना चाहता था जीवन और कहां फंसा दिया।।

 


संदीप सिंधवालमैं संदीप सिंधवाल संजू पुत्र श्री तुंगडी सिंधवाल रौठिया रुद्रप्रयाग उत्तराखंड का निवासी हूं। मैंने हिंदी में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम. ए. किया है तथा कलनरी आर्ट फूड साइंस में बी. एस. सी. किया है। 5 साल दिल्ली के एक होटल में शेफ की नौकरी करने के पश्चात मै 5 साल से ऑस्ट्रेलिया के समीप पोर्ट मोरस्बी में कार्यरत हूं। मेरा व्यवसाय मेरे लेखन से बिल्कुल विपरीत है।

विदेश में रहकर भी मैंने बहुत कविताएं लिखी हैं। मै सन 2000 से कविताएं लिखता हूं जो विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। मैट्रिक पास करने के बाद ही मेरी कविता रचना मै रुचि बढ़ी। भगवान रुद्र पर कविता लिखना मेरा सौभाग्य है। विदेशों में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए भरसक प्रयास करता हूं।

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