कविता काली का हो अवतार | Kaali Ka Ho Avtaar Kavita
आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता काली का हो अवतार :- कविता काली का हो अवतार बढ़ते कलयुग की छाया में पाया असुरों ने फिर आकार, फिर काली का हो अवतार, फिर काली का हो अवतार। सत्यभूमि अब बनी मरुस्थल झूठ की बढ़ रही पैदावार, फिर काली का हो अवतार,…

