हिंदी कविता प्राणायाम | Hindi Kavita Pranayam

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हिंदी कविता प्राणायाम

हिंदी कविता प्राणायाम

प्राणों का रक्षक, होता है प्राणायाम।
नित्य करना चाहिए, सुबह और शाम।

बाह्य अंगों के लिए, होता है योग।
प्राणायाम बनाता है, आंतरिक अंगों को निरोग।

दिनचर्या का हिस्सा हो, आसन और योग।
पर एक दूसरे का, मत भूलो करना सहयोग।

बृस्तरिका कपालभांति, करें अनुलोम विलोम।
शांति व सकारात्मकता बढ़ेगी, पर अंत में जरूर हो ओउम।

जीवन में शुद्ध हो, आहार व्यवहार।
यम नियम का करके पालन, अपनाओ अच्छे संस्कार।

प्राणायाम से बढ़ता है, हमारा श्वास व प्रश्वास।
पर नियमितता है जरूरी, घर हो या प्रवास।

सदैव प्रसन्न रहना भी, ईश्वर की है भक्ति।
प्राणायाम है, इसकी सबसे अच्छी युक्ति।

प्राणायाम से ही मिलती है, जीवनदायिनी शक्ति।
चित्त स्थिर रहता है, खूब करो ईश्वर की भक्ति।

दुनिया को योगासन, है भारत की देन।
भारत में पहले, आर्युवेद व योग शिक्षा थी मेन।

शरीर है अंदर से स्वस्थ, तो आए कोई भी बीमारी।
प्रतिरोधक क्षमता ही,कर देते है मटियामेट सारी।

आज देश विदेश में, प्राणायाम की महिमा बड़ी है।
कोरोना महामारी में, प्राणायाम जीवन की जड़ी‌‌ है।

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“रचनाकार का परिचय

हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति ( रिसोर्स पर्सन ) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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