मास्क पर कविता | Hindi Poem On Mask

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मास्क पर कविता

मास्क पर कविता

कोरोना ने दिया सबको, छोटा सा एक टास्क।
मुझ से बचना है तो, लगाना होगा मास्क।

घर में रहना मास्क लगाना, है आसान।
पर फिर भी देखो, अनजान बन रहा इंसान।

मास्क कोरोना के साथ, बचाता है धुआं,धूल व एलर्जी।
दमा और क्षय रोग,इनसे लड़ने की भी मिलती है एनर्जी।

मास्क को स्टाईलिश नही बनाना, सुरक्षा के हिसाब से लगाना।
मुंह नाक को ढकना, तभी महामारी से होगा बचना।

बच्चा, बुढ़ा या जवान, घर, बाजार या दुकान।
हर समय हर जगह, मास्क को चढ़ाए रखो कान।

साफी, रुमाल और तौलिया, नही है मास्क समान।
दो लहर का मास्क ही, मिटाएगा कोरोना का नामो-निशान।

ले लो सब यह प्रण, घर के बाहर निकले कदम।
मास्क और हेलमेट, दोनों बने हमारे हमदम।

कोरोना से नही डरना, वैक्सीन जरूर लगवाना।
दो गज की दूरी व मास्क, लगाना नही भूलजाना।

जिंदगी बचाना है जरूरी, हम है तो जंहा है।
हम नही रहे तो, फिर सुनसान यहां है।

इसलिए हंसराज हंस कहता है, मास्क है जरूरी।
नियम का करना है पालन, इसको मत समझो अपनी मजबूरी।

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“रचनाकार का परिचय

हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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