स्वर्ग की कल्पना पर कविता | Swarg Ki Kalpna Par Kavita
आप पढ़ रहे हैं स्वर्ग की कल्पना पर कविता :- स्वर्ग की कल्पना पर कविता सहसा पहुंचा स्वर्ग द्वार पर दृश्य वहां के बड़े निराले थे। उड़ती मछली तैरते विहंग सबका मन मोहने वाले थे।। धरा फूलों से भरी हुई थी सुगंध फैली थी चारों ओर। दूध की नदी में…

