हिंदी प्याला के हिंदी कविता संग्रह में पढ़िए :-
माँ पर कविताएं , प्रकृति पर कविताएं , शिक्षक दिवस पर कविताएं , माँ पर कविता हिंदी में , गुरु पर कविताएं , पेड़ पर कविताएं , नारी पर कविताएं , महिलाओं पर कविताएं , पानी पर कविताएं , बादल पर कविताएं , बहन पर कविता इन हिंदी , पर्यावरण पर कविता इन हिंदी , सैनिक पर कविता इन हिंदी 15 अगस्त पर कविताएं , अनुशासन पर कविताएं , खुशी पर कविताएं , गांधी पर कविताएं , गरीबी पर कविताएं , घड़ी पर कविताएं , चाँद पर कविताएं , जिंदगी पर कविताएं , जन्मदिन पर कविताएं , जल पर कविताएं , देशभक्ति पर कविताएं , नदी पर कविताएं , भारत पर कविताएं , रक्षाबंधन पर कविताएं , रिश्तों पर कविताएं , शहीदों पर कविताएं , शिक्षा पर कविताएं , स्वच्छता पर कविताएं , गुरु पर कविता हिंदी में , वसंत पर कविता हिंदी में , पर्यावरण पर कविता हिंदी में , राम पर कविताएं

Best Poem On Pen In Hindi | कलम पर कविता

Poem On Pen In Hindi - आप पढ़ रहे हैं कलम पर कविता " कलम हूं कलम मैं " :- Poem On Pen In Hindi कलम पर कविताकलम हूं कलम मैंअनोखी कलम हूं।  कोरा था कागजथी मंजिल सफर परचली चाल टेढ़ीपकड़ कर डगर को कभी हाथ जज केमुकद्दर लिखी हूंकभी…

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Hindi Ka Mahatva Par Kavita | हिंदी का महत्व पर कविता

Hindi Ka Mahatva Par Kavita - आप पढ़ने जा रहे हैं हिंदी का महत्व पर कविता :- Hindi Ka Mahatva Par Kavita हिंदी का महत्व क्या है- इक कुपढा मुझसे पूछता है, हिंदी के अपवादों के भीतर तर्क लग्न से खोजता है,हिंद-शब्द मुँह से फूट पड़ने पर  मुँह को अपने मसोसता…

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आधुनिक शिक्षा पर कविता | Adhunik Shiksha Par Kavita 

आधुनिक शिक्षा पर कविता | Adhunik Shiksha Par Kavita आधुनिक शिक्षा पर कविता शिक्षित से अच्छा अनपढ़ थाफिर भी शिक्षित से बढ़कर थाअपने अपनों का अपनापनसुशीतल मधुर सुधाकर था अब अनपढ़ से मैं शिक्षित हूंसंस्कारों से परिशिक्षित हूंफिर भी न जाने क्यूं खुद सेखुद ही खूब मैं लज्जित हूं …

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Emotional Maa Par Kavita | माँ पर भावुक कविता

Emotional Maa Par Kavita - आप पढ़ रहे हैं माँ पर भावुक कविता " माँ दर्द बहुत है सीने में " :- Emotional Maa Par Kavita वो पहले सी हसरत अबनहीं रही है जीने में।आँचल में अपने छिपा लेमाँ दर्द बहुत है सीने में।। दर-दर ठोकर खाई मैंनेपर पीड़ा को…

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विश्व शांति दिवस पर कविता | Vishva Shanti Diwas Par Kavita

आप पढ़ने जा रहे हैं विश्व शांति दिवस पर कविता :- विश्व शांति दिवस पर कविता उठ रहे नभ में शिखाएंजल रही मंडल दिशाएंखुद लगाकर आग जलता दुष्कर्म छोड़ेगा नहीं,तू हार मानेगा नहीं। देख लो इतिहास अपनाहो गया सब खाक सपनाहाथ मलते चल पड़ोगे कुछ साथ जायेगा नहीं,तू हार मानेगा…

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बदलते रिश्ते कविता | Badalte Rishte Kavita

पढ़िए रामबृक्ष कुमार जी की " बदलते रिश्ते कविता " बदलते रिश्ते कविता अब तो रिश्तों पर भरोसा न रहा रिश्तों का रंगअपनों के संग होते हैं गाढ़ेसदा के लिएन होते दुरंग न होंगेकभी भीन बदलेंगे ये बनते रिश्ते, ये पवित्रअनमोलसुवाचमजबूत भरोसे पर टिका रिश्ता न रहा,अब तो रिस्तों पर भरोसा…

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विवाह पर हास्य कविता – बिन बुलाए मेहमान | Vivah Par Hasya Kavita

आप पढ़ रहे हैं रामबृक्ष कुमार जी द्वारा रचित विवाह पर हास्य कविता " बिन बुलाए मेहमान " विवाह पर हास्य कविता बड़े ठाठ से दावत खाने, पहुंचे गंगू भाईतन पर सूट बूट पांव में,टांग गले में टाई कभी घराती कभी बराती,ठन बन दौड़ मचातेठाट बाट से कौन पूछता,क्यों किसको…

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पन्ना धाय और पुत्र चंदन | Panna Dhai Aur Putra Chandan

पन्ना धाय और पुत्र चंदन - इतिहास में अमर है मेवाड़ के कुंवर उदय प्रताप ( महाराणा प्रताप )और पन्ना धाय की कहानी, मगर पन्ना के पुत्र चंदन की वेदना कोई न पढ़ सका। आप पढ़िए सरिता गर्ग 'सरि' जी की कलम से लिखी पन्ना पुत्र चंदन की कहानी और उसकी…

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एक सुंदर कविता – सुंदर हो जब चरित्र | Ek Sundar Kavita

एक सुंदर कविता - आप पढ़ रहे हैं बिमल काका गोलछा "हँसमुख" जी की एक सुंदर कविता " सुंदर हो जब चरित्र " एक सुंदर कविता चित्र से भी सुंदर हो जब चरित्र,धब्बा लगे ना, हो पावन पवित्र।सबके दिल बसे वो अलौकिक,ऐसा चरित्र जब मिलेगा सर्वत्र।। भवन भी सुंदर हो…

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हिंदी कविता रीति जगत की | Hindi Kavita Reeti Jagat Ki

आप पढ़ रहे हैं प्रियंका गौतम जी द्वारा रचित " हिंदी कविता रीति जगत की " :- हिंदी कविता रीति जगत की रीति जगत की जाने न कोई प्रेम की बाँसुरी पहुँचाने ना कोई नन्हें-नन्हें स्वप्न देख सोते जागते यहाँ सृष्टि की रीती जाने न कोई कभी कोई कहता , कभी जब है कहता मधुर चक्र निचोड़ सा, मोह में खोयें जब-जब सोचू , निर्मल-कोमल मोह है किसका माँ का प्यार अब जाने ना कोईरीती जगत की जाने न कोई रीति जाग की जाने ना कोई क्रोध मनुष्य मुख लज्जित सा हुए मैं की अभिलाषा कर प्रथम-प्रथम परिचित हैं देतादेख पुण्य प्रहार कर दुख भोगी हुईरुनझुन- रुनझुन  मन गीत के है पुकारे पर मानव आज अपनी परछाई को भी नकारें जाग की चिंता मुख़ पर हुए अजर अमर बनने की चाह मेंखुद को भूल है जाये पर,लोगों की भीड़ में आंखें बंद कर सो जाएं रीति जाग की जाने ना कोई  रीति जाग की जाने ना कोई प्रेम पाने की अभिलाषा कहा कलियुग में हुए त्याग कर खुशियों का हहकर है मचाए नीले नीले अम्बर पर एक दिन ख़ुद को अकेला हैं पाए मुझे चाहा बस है इतनी मेरी जय-जय कार  जगत में हुईं रीति जाग की जाने ना कोई  रीति जाग की जाने ना कोई ॥ पढ़िए :- बदलते रिश्तों पर कविता "आसमाँ में उड़ने लगे" रचनाकार का परिचय यह कविता हमें भेजी है प्रियंका गौतम जी ने दिल्ली से। “ प्रेरणादायक कविता…

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हिंदी कविता अंतरिक्ष | Hindi Kavita Antriksh

प्रस्तुत है रामबृक्ष कुमार जी द्वारा रचित " हिंदी कविता अंतरिक्ष " :- हिंदी कविता अंतरिक्ष आओ मन के अंतरिक्ष मेंसैर कर लें। चांद की शीतल प्रभाचित् में पिरोए आज हमशांत कर चित् चेतनाजगमग बनाए रात हम, बन बैरी तम के गमों सेबैर कर लें,आओ मन के अंतरिक्ष मेंसैर कर लें। सूर्य…

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हिंदी कविता बलात्कार | Hindi Kavita Balatkar

प्रस्तुत है चारू मित्तल जी द्वारा रचित हिंदी कविता बलात्कार :- हिंदी कविता बलात्कार ना जानी ना समझी,कुसूर मेरा,अपराध मेरा,मै तो थी मासूम कली।अपनी डाल पे मैं खिली।। कुछ सपने सतरंगी से,जो धनक मे भिगोते से थे।कुछ ख्वाब अधपके से,जो गालो पे लाली संजोते से थे।। अभी तो ना मोहब्बत…

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