एक सुंदर कविता – सुंदर हो जब चरित्र | Ek Sundar Kavita

एक सुंदर कविता – आप पढ़ रहे हैं बिमल काका गोलछा “हँसमुख” जी की एक सुंदर कविता ” सुंदर हो जब चरित्र “

एक सुंदर कविता

एक सुंदर कविता

चित्र से भी सुंदर हो जब चरित्र,
धब्बा लगे ना, हो पावन पवित्र।
सबके दिल बसे वो अलौकिक,
ऐसा चरित्र जब मिलेगा सर्वत्र।।

भवन भी सुंदर हो सुंदर भावना,
दिल में ना रखना कभी वासना।
पर धन पर स्त्री पे नजर ना रखें,
उसकी इज्जत हो बड़ी चावना।।

साधन संपन्न हो ना रेखा लांघना,
शांत शीतल रख मन की साधना।
संकट कभी तुम्हें छू नहीं पाएगा,
जब गुरु प्रभु की करें आराधना।।

दृष्टि भाव जागृत हो जब मन के,
दृष्टिकोण सुंदर हो जन जन के।
दया दृष्टि रखना तू सब पर प्रभु,
“हँसमुख” भाव सुंदर हो सब के।।

पढ़िए :- चरित्र निर्माण पर कविता “राहों के कोमल फूल बनो”


रचनाकार का परिचय

बिमल काका गोलछा "हँसमुख"

यह कविता हमें भेजी है बिमल काका गोलछा “हँसमुख” जी ने श्रीडूंगरगढ़ (बीकानेर) राजस्थान से।

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