रिश्तों पर कविताएं ( Rishton Par Kavitayen )

माता – पिता . भाई – बहन , बेटा , चाचा – चाची , नाती – नातिन , दोस्त , प्रेमी – प्रेमिका , नाना – नानी आदि पर कविताएं

Guru Mahima Par Kavita | Best Poem On Teacher

Guru Mahima Par Kavita आप पढ़ रहे हैं गुरु महिमा पर कविता :- Guru Mahima Par Kavitaगुरु महिमा पर कविता आंख मूंद झांकू अन्तर्मन,पाऊं पावन पग अवलंबन,परम पूज्य ईष्ट गुरु जनकर जोड़ करू अभिनंदन। चित चरित्र चेतना सृजनकर्ताभाषा भाव भावना प्रवर्तामात-पिता तो जीवन दाता,गुरू देव आप भाग्य विधाता। जाति धर्म सब एक न माना,गैरों…

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पिता पर कविता – श्रद्धेय पिता जी | Pita Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं ( Pita Par Kavita ) पिता पर कविता :- पिता पर कविता पूज्य पिता जी की,कोमल छांव को किन शब्दों में उल्लेख करूँ । निर्णय लिया आज जीवन की पुस्तक के उन,पन्नों को पढ़ लूं । प्रतीत ऐसा हो रहा, मैं अतीत आज, वर्तमान बना लूं…

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Mata Pita Par Kavita | माता पिता पर कविता | New Poem Dedicated To Parents

आप पढ़ रहे हैं ( Mata Pita Par Kavita ) माता पिता पर कविता :- Mata Pita Par Kavitaमाता पिता पर कविता न जाने वो दिल में अपनेकितने दर्द छिपाते हैंवो तो संग हमारेसदा ही मुस्कुराते हैं,होते हैं परेशां जब भीजरा न हमको जताते हैंवो तो संग हमारेसदा ही मुस्कुराते…

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Pita Par Kavita | पिता पर कविता :- उपकार पिता के

आप पढ़ रहे हैं ( Pita Par Kavita ) पिता पर कविता :- पिता पर कविताPita Par Kavita उपहार पिता केगिनती करना मुश्किल है,उपकार पिता केगिनती करना मुश्किल है। नश-नश में जिसका रक्त बहेरहे स्वाभिमान से भरा-भरा,नभ भी मानो छोटा लगताघर आँगन हो हरा-हरा, इज्जत, शौहरत, रुतबे कादम भरतें है…

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माँ की याद कविता | Maa Ki Yaad Kavita

आप पढ़ रहे हैं ( Maa Ki Yaad Kavita ) माँ की याद कविता :- माँ की याद कविता   माँ तुम बिन क्या हाल हुआ पल-पल सदियाँ कहती है, लौट आओ तुम फिर से माँ अखियों से नदियाँ बहती है, तुम बिन कैसे जीते हैं सब इक पल ये…

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कविता प्यारी नन्ही परी | Kavita Pyari Nanhi Pari

आप पढ़ रहे हैं ( Kavita Pyari Nanhi Pari ) कविता प्यारी नन्ही परी :- कविता प्यारी नन्ही परी नन्ही परी है मां की छाया हमेशा रहती मां का साया संसार दुनिया को रचती है अद्भुत होती इसकी माया छोटी सी है काया। तन मुट्ठी में समाया। बंद आंखें करे…

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बहन के लिए कविता | Bahan Ke Liye Kavita

आप पढ़ रहे हैं बहन के लिए कविता :- बहन के लिए कविता बहन तो गुड़िया है मेरी, ओर मम्मी पापा है जान। मज़ाक मस्ती खूब वो करती, है उसका भय्या ही अभिमान। उसकी हर सुख दुःख खातिर, निछावर रहती हैं जान। बहन तो गुड़िया है मेरी, उसको भय्या का…

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कविता पिता के लिए :- कभी धरती और आसमान है पिता

आप पढ़ रहे हैं कविता पिता के लिए :- कविता पिता के लिए कभी धरती और आसमान है पिता, मेरा अभिमान व स्वाभिमान है पिता,, बेशक जन्म दिया है मां ने पर, मेरी परवरिश का आधा ज्ञान है पिता, जो बचपन में मनमानी की थी मैने, हर उस जिज्ञासा की…

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पिता के लिए हिंदी कविता | Pita Ke Liye Hindi Kavita

आप पढ़ रहे हैं पिता के लिए हिंदी कविता :- पिता के लिए हिंदी कविता पिता के लिए कोई,,,, एक दिन नहीं होता,,,, सब के सब दिन खास होते हैं, घर के सूने आँगन में , पिता की यादों में माँ की नम आंखों ने,,,,,,, सब कुछ बयांँ किया। कुछ…

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Beti Par Hindi Kavita | बेटी पर हिंदी कविता – स्वाभिमान है बिटिया |

Beti Par Hindi Kavita आप पढ़ रहे हैं बेटी पर हिंदी कविता :- Beti Par Hindi Kavitaबेटी पर हिंदी कविता विवाह की दहलीज पर बैठी।वह वैदही सी लगती है ।।कर सोलह सिंगार लाल जोड़े में ।बहुत खूबसूरत सी लगती है ।। फिरों की विधि में बैठी ।माता-पिता का स्वाभिमान लगती…

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घर के बंटवारे पर कविता :- बँटवारे का माहौल

आप पढ़ रहे हैं घर के बंटवारे पर कविता :- घर के बंटवारे पर कविता तन्हाईयों का शोर फिर से, गूँजने लगा है शहर में। जाने क्या से क्या हुआ ये, सोच रहे हैं डर ही डर में। कुछ रिश्तेदारों के सम्मुख, बैठ गए सब आँगन में, बँटवारे का माहौल…

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गृहिणी पर कविता :- आसान कहाँ था गृहिणी होना

घर को स्वर्ग बनाने वाली गृहिणी पर कविता :- गृहिणी पर कविता चलती कलम छोड़ झाडू घसीटना, दूध की मलाई खाना छोड़ मक्खन के लिये बचत करना, दुपट्टे से उम्र के सम्बंध जोड़ना कभी साड़ी में घसीटना। कभी चुनरी खीसकने से संभालना, किताबें छोड़, गृहस्थी पढ़ना, एक एक फुल्का गोल…

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