मित्र पर कविता – मित्र वही जो खुल कर बोले | Mitra Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं मित्र पर कविता :- मित्र पर कविता मित्र वही जो खुल कर बोलेहिय की बात भी मुंह पर खोलेनहीं छुपाए कोई बातदेता हर सुख दुख में साथप्यार का मधुरस दिल में घोले,मित्र वही जो खुल कर बोले।  हर दुःख को वह अपना,समझेबात बड़ी हो पर ना…

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कविता कैसी शिक्षा कैसा नाम | Kavita Kaisi Shiksha Kaisa Naam

आप पढ़ रहे हैं कविता कैसी शिक्षा कैसा नाम :- कविता कैसी शिक्षा कैसा नाम क्या है उत्तर क्या है दक्षिण कैसी शिक्षा कैसा नाम भोली भाली कितनी प्यारी जनता को रोटी से काम  भाड़ में जाए पढ़ना लिखना अच्छा जीवन अच्छा धाम जो होगा देखा जाएगा पैक बनेगा हर एक शाम किए बिना ही मेहनत…

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सरदार वल्लभ भाई पटेल पर कविता | Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi

आप पढ़ रहे हैं सरदार वल्लभ भाई पटेल पर कविता :- सरदार वल्लभ भाई पटेल पर कविता लौह सा टंकार लेकरसिंह सा ललकार लेकरनाद  भरते  गर्जना  काअग्नि  सा धधकार लेकर,  जी रहे जब लोग तिल तिलमर  रहे  थे  लोग फिर फिरआ   मसीहा  बन  खड़े  थे4हिंदुस्तानी शान लेकर।  थे  एक  सरदार …

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कविता कर्म या मुकद्दर | Kavita Karm Ya Mukaddar

आप पढ़ रहे हैं कविता कर्म या मुकद्दर :- कविता कर्म या मुकद्दर एक दिननिकला सड़क परशाम लगभग नौ बजे मैं गया कुछ दूर देखासब्जियां कुछ थे सजे,टिमटिमाते मोमबत्तीकी उजाला के तलेबेंचती वह सब्जियांतन मांस जिसके थे गले। था अचंभित सोंच में कुछजान भी मैं न सकाबैठ इतनी रात में वहबेंचती…

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जात पात पर कविता – जात पात से दूर | Jaat Paat Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं जात पात पर कविता :- जात पात पर कविता कुछ आराजक तत्वों के कारण ही मिली विषमता है।और हमें भी याद नहीं की हम में कितनी क्षमता है ।। कुतर्कियों के आंगन का संसार सजाया है हमने,अपने ही आदर्शों को बेकार बताया है हमनें,जाने अनजाने कुछ…

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रेजांगला युद्ध 1962 कविता | Rezang La War Poem In Hindi

आप पढ़ रहे हैं रेजांगला युद्ध 1962 कविता :- रेजांगला युद्ध 1962 कविता मैं सूरज के तेजपुंज से तिमिर मिटाने आया हूं ।इतिहासों के छुपे हुए पन्ने दिखलाने आया हूं ।। धूल धूसरित स्वर्णिम पन्नों की मैं धूल हटाऊंगा,और वीरता के स्वर मे भारत का गौरव गाऊंगा,वसुन्धरा के पुण्य अंक…

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माँ बाप पर कविता – मां बाप के ही रूप में

आप पढ़ रहे हैं माँ बाप पर कविता - माँ बाप पर कविता लोक जन कल्याण हेतुलिख रहे जो काव्य हैं,पीढ़ियों को सीख देकरदे रहे जो ताप है, रह गया वंचित अगर जोआज के इस बात सेउसके लिए…

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परिवार पर हिंदी कविता – परिवार बचा लो हे भगवन

आप पढ़ रहे हैं परिवार पर हिंदी कविता परिवार पर हिंदी कविता अरुणोदय की आभा का विस्तार बचा लो हे भगवन।भारत मां के आंगन के परिवार बचा लो हे भगवन।। परिवार वही जो अपनेपन के भावों से हो भरा हुआ,रिश्तों का संसार जहां हो प्रेम सिंधु से घिरा हुआ,प्रेम सिंधु…

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गिलहरी पर कविता – एक गिलहरी | Gilahri Par Kavita

आप पढ़ रहे हैं गिलहरी पर कविता :- गिलहरी पर कविता एक गिलहरी मेरे पोस्ट के चारों ओर भटकती है,रुक-रुक कर वो बड़े प्यार से मेरी ओर घूरती है।मुझे लगा कि वह बेचारी मॉर्निंग वाक पर आई है,लेकिन वह भूख मिटाने के खातिर दाना लेने आई है।। उम्मीद भरी निगाहों…

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कलम पर हिंदी कविता – मेरी कलम

आप पढ़ रहे हैं कलम पर हिंदी कविता - मेरी कलम कलम पर हिंदी कविता मेरी कलम…….ना कभी थकती है,ना कभी रुकती है!बस अपने लक्ष्य के प्रति बढ़ती है।मोह-माया से गुजर कर,एक नई कविता लिखती है। कुछ सुलझे और कुछ असुलझे,हर कुछ न कुछ लाती है।शब्दों की यह महारानी है,कुछ…

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कविता सुकून की तलाश | मन पर कविता

आप पढ़ रहे हैं कविता सुकून की तलाश और मन पर कविता :- कविता सुकून की तलाश कभी भीड़, कभी एकांत, कभी आवाराबनकर घूमती हूँ में l यकीन मानों अब ख्वाबों में भी तो सुकून नहींअब हर रोज रात में सितारों से झगड़ती हूँ में l फुर्सत के पल तलाशती…

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माँ को समर्पित कविता – मां आकर मुझे बताओ | Maa Ko Samarpit Kavita

आप पढ़ रहे हैं " माँ को समर्पित कविता " :- माँ को समर्पित कविता हे! मां आकर मुझे बताओयह मुझे समझ ना आए क्यों?सब क्यों उलझा उलझा लगतायह कोई ना समझाए क्यों? पूछो पूछो पुत्र सयानेहै खीझा खीझा उलझा क्यों?कौन प्रश्न हैं इतना भारीजो नहीं अभी तक सुलझा क्यों?…

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