आदमी पर हिंदी कविता – जो सबको हॅंसाता रहे | Aadmi Par Hindi Kavita
आप पढ़ रहे हैं " आदमी पर हिंदी कविता " :- आदमी पर हिंदी कविता आदमी है जो सबको हॅंसाता रहेखुद भी हॅंसता रहे मुस्कराता रहे। दूर कर दे हर दुखड़े हॅंसी प्यार सेजीत ले सारी मुश्किल सदाचार से लाख बाधाएं आए उसे भूल कर आगे बढ़ते कदम को बढ़ाता रहे, आदमी…

