आदमी पर हिंदी कविता – जो सबको हॅंसाता रहे | Aadmi Par Hindi Kavita

आप पढ़ रहे हैं " आदमी पर हिंदी कविता " :- आदमी पर हिंदी कविता आदमी है जो  सबको हॅंसाता रहेखुद भी हॅंसता रहे मुस्कराता रहे।  दूर कर दे हर दुखड़े हॅंसी प्यार सेजीत ले सारी मुश्किल सदाचार से लाख बाधाएं आए उसे भूल कर आगे बढ़ते कदम को बढ़ाता रहे, आदमी…

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हिंदी कविता जिंदगी की किताब | Hindi Kavita Zindagi Ki Kitab

आप पढ़ रहे हैं हिंदी कविता जिंदगी की किताब :- हिंदी कविता जिंदगी की किताब एक दिन पढ़ने लगाजिंदगी की किताब, पलटने लगा पल पल के पन्नों कोऔर समझने लगा बीती दास्तां। खोता गया अतीत के शाब्दिक भाव में,मन में उभरने लगा अक्षरता एक चित्र। लोग इकट्ठा थे बोल रहे…

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कविता प्रमुदित थे संगीत में | Kavita Pramudit The Sangeet Me

आप पढ़ रहे हैं " कविता प्रमुदित थे संगीत में " :- कविता प्रमुदित थे संगीत में शून्य गगन,शशि नूतनहाथों में रजत धार लियेसुमधुर ध्वनि,नूपुर संगअक्ष पर अविरत नृत्य करते **!! असंख्य ग्रह और अनंत तारेपग बढ़ाते,चढ़े क्षितिज सेशब्द रहित,प्रेम की भाषा मेंप्रमुदित हो,संगीत बहाते**!! शुभ्र श्रृंगार कर,शशि किरणेंघोल रहीं…

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कविता भारत की धरा | Kavita Bharat Ki Dharaa

आप पढ़ रहे हैं " कविता भारत की धरा " :- कविता भारत की धरा अश्रु था,नीर नहींअभिशाप का अंगार थाप्रलय की ज्वाला मेंथी भारत की,अमर धरा… आंधी थी,चारों दिशाएँपड़ गई थी वो बंधन मेंराहें भी अंधेरी सी थींपर था,अगाध संकल्प भरा…. निरंतर आविर्भूत होआक्रमण की शोध क्या,परिणाम क्याबस हुआ…

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कर्मों पर कविता | Hindi Poem On Karma

आप पढ़ रहे हैं " कर्मों पर कविता " :- कर्मों पर कविता कर्मों से भैया - बंधु मिलेंकर्मों से मिलती है नारी कर्मों से पूत - कपूत मिलेंकर्मों से बाप और महतारी कर्मों से स्वर्ग - नरक मिलतेकर्मों की हैं बातें सारी कर्मों से सुख - दुख मिलते हैंकर्मों से है दुनिया सारी योग - वियोग होहिं कर्मों सेकर्मों से प्रेम और फौजदारी गुलाम बनें हम कर्मों सेकर्मों की है जी सरदारी सम्मान भी मिलता कर्मों सेकर्मों से होती है ख्वारी "जग्गा" सब फल है कर्मों काकर्मों की है महिमा न्यारी पढ़िए :- कर्म पर हिंदी कविता | कर्मयुद्ध के भीषण रण में रचनाकार का परिचय यह कविता हमें भेजी है जगवीर सिंह चौधरी…

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हिंदी कविता ममतामयी माँ | Hindi Kavita Mamtamayi Maa

आप पढ़ रहे हैं "हिंदी कविता ममतामयी माँ " :- हिंदी कविता ममतामयी माँ (तर्ज: जिसकी प्रतिमा इतनी…..) ममतामयी माँ शरण में आयाअपनी दया दिखा देनामेरे सिर पर हाथ धरो माँज्ञान की ज्योति जगा देनाज्ञान की ज्योति जगा देना…..2 तु बिगडे़ सबके काज संवारेरोम रोम आभास तेराश्रद्धा की आवाज तुझी…

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कविता माँ की जय जयकार | Kavita Maa Ki Jai Jaikar

आप पढ़ रहे हैं "कविता माँ की जय जयकार ":- कविता माँ की जय जयकार बिठा के अपने मन मंदिर मेंमाँ की जय जयकार करो !फूल मिलें चाहे मिले हो कांटेसबको हंसके स्वीकार करो !! सारी दुनिया को छोड़ करहम शरण तुम्हारी आए हैं !जिसमें हो हम सबका भलावह अब…

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कविता अपने आँचल की ममता | Kavita Apne Aanchal Ki Mamta

आप पढ़ रहे हैं कविता अपने आँचल की ममता :- कविता अपने आँचल की ममता अपने आँचल की ममता मेरे सिर धरो।मैया नश्वर है तन इसको पावन करो।। आस बरसों से दिल में लगा के रखीइक दिन घर को हमारे माँ आयेगी तु,तेरी ममता की छाया मिलेगी हमेंआके बच्चों को…

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कविता माँ तो है परछाई | Kavita Maa To Hai Parchhai

कविता माँ तो है परछाई कविता माँ तो है परछाई माँ तो है परछाई हमारीइसकी दया का मोल नहीं!मागें बिना हो मुरादें पूरीइसकी कृपा का तोल नहीं!! तन मन निज अर्पण करकेचरणों में शीश झुकाना सब,कहो शरण में तेरी आयें हैसंकट हरोगी मेरे कब,जुबां में रस भक्ति का भरदेतेरे सिवा…

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कविता माँ की यादें – तेरे इस आँचल में | Kavita Maa Ki Yaadein

कविता माँ की यादें कविता माँ की यादें मेरी उम्र बीतती जाती हैपल-पल तुझे बुलाने में!जाने कितनी यादें भरी हैतेरे इस आँचल में!! क्या सच में दूर गयी है हमसेऐसा हमको लगा नहीं,भावों को समझा निज मन केदु:ख में कभी मैं भगा नहीं,इक सुकून सा मिलता हैखुद को यूँ ही…

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धूप पर कविता – जाड़ें की धूप | Dhoop Poem In Hindi

धूप पर कविता धूप पर कविता बादलों की झुरमुटसे झांकता सूरजमानों खेलता नन्हाओज से भराबालक झांक रहा हो, चमकता तेजसुनहरा बदनरक्त लालिमायुक्त धीरे धीरेमानव दुनिया मेंकदम रखएक टक ताक रहा हो, मानव में कुलबुलाहटशुरू हो गईआहट पाते हीसूरज का,किसी अपनेजीवन का आधारसा इसे हर कोई आक रहा हो, हर्षित तन मनखिलते मुस्कराते…

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कविता अखंडता की अस्मिता | Kavita Akhandta Ki Asmita

कविता अखंडता की अस्मिता कविता अखंडता की अस्मिता अखंडता की अस्मिता को शत्रु छेड़ते हो जब,तो एकता के जागरण का गान कविता है सुनो,राष्ट्र की समुन्नति जब अवनति के द्वार हो तो, चेतना में प्राण का उत्थान कविता है सुनो,सिन्धु पार जाने को बजरंगी भूले शक्ति को,तो जामवंत जो जगाएं शक्ति…

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