गिलहरी पर कविता – एक गिलहरी | Gilahri Par Kavita
आप पढ़ रहे हैं गिलहरी पर कविता :- गिलहरी पर कविता एक गिलहरी मेरे पोस्ट के चारों ओर भटकती है,रुक-रुक कर वो बड़े प्यार से मेरी ओर घूरती है।मुझे लगा कि वह बेचारी मॉर्निंग वाक पर आई है,लेकिन वह भूख मिटाने के खातिर दाना लेने आई है।। उम्मीद भरी निगाहों…

