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कर्मों पर कविता

कर्मों पर कविता

कर्मों से भैया – बंधु मिलें
कर्मों से मिलती है नारी

कर्मों से पूत – कपूत मिलें
कर्मों से बाप और महतारी

कर्मों से स्वर्ग – नरक मिलते
कर्मों की हैं बातें सारी

कर्मों से सुख – दुख मिलते हैं
कर्मों से है दुनिया सारी

योग – वियोग होहिं कर्मों से
कर्मों से प्रेम और फौजदारी

गुलाम बनें हम कर्मों से
कर्मों की है जी सरदारी

सम्मान भी मिलता कर्मों से
कर्मों से होती है ख्वारी

“जग्गा” सब फल है कर्मों का
कर्मों की है महिमा न्यारी

पढ़िए :- कर्म पर हिंदी कविता | कर्मयुद्ध के भीषण रण में


रचनाकार का परिचय

जगवीर सिंह चौधरी

यह कविता हमें भेजी है जगवीर सिंह चौधरी जी ने लोहकरेरा, रुनकता, आगरा से।

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