हिंदी कविता सरस्वती वंदना | Kavita Saraswati Vandana

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हिंदी कविता सरस्वती वंदना

हिंदी कविता सरस्वती वंदना

वीणा धारिणीं , वाणी सवारिणीं,
वाणी आज सँवार दे…
हर साज में तूँ, हर वाद्य में तूँ,
धुन मधुर गुन्जार दे….

तेरी छाया में पल करके,
कवि पंडित विद्वान बने।
ज्ञान रश्मि से आलोकित हो,
कितने आज महान बने ।।
हंश वाहिनी, ज्ञान दायिनी,
मधुरिम स्वर उपहार दे…. ।। 1 ।।
वीणा धारिणीं , वाणी सँवारिणीं…..

वीणा पुस्तक रंजित हस्ते,
वागेश्वरि माँ तुभ्यं नमस्ते ।
कमलासिनि माँ कमल नयनी तुम,
वर माला तव हस्ते ।।
सप्त स्वरों की सुरसरि भारति,
यहाँ अभी उतार दे ……
वीणा धारिणीं, वाणी सँवारिणीं….

सप्त स्वरों की वीणा अम्बे,
आज यहाँ पर बज जाये ।
लय तानों की तरल तरंगें,
आज पटल पर सज जाये ।।
झनन झनन झन झन झन झन,
झंकृत ध्वनि झंकार दे …….
वीणा धारिणीं वाणी सवारिणीं,
वाणी आज सँवार दे…
हर साज में तूँ, हर वाद्य में में तूँ,
धुन मधुर गुन्जार दे…

पढ़िए :- माँ सरस्वती की कविता | मां शारदे इतना उपकार करो


रचनाकार का परिचय

रूद्र नाथ चौबे ("रूद्र")नाम – रूद्र नाथ चौबे (“रूद्र”)
पिता- स्वर्गीय राम नयन चौबे
जन्म परिचय – 04-02-1964

जन्म स्थान — ग्राम – ददरा , पोस्ट- टीकपुर, ब्लॉक- तहबरपुर, तहसील- निजामाबाद , जनपद-आजमगढ़ , उत्तर प्रदेश (भारत) ।

शिक्षा – हाईस्कूल सन्-1981 , विषय – विज्ञान वर्ग , विद्यालय- राष्ट्रीय इंटर कालेज तहबरपुर , जनपद- आजमगढ़ ।
इंटर मीडिएट सन्- 1983 , विषय- विज्ञान वर्ग , विद्यालय – राष्ट्रीय इंटर कालेज तहबर पुर , जनपद- आजमगढ़।
स्नातक– सन् 1986 , विषय – अंग्रेजी , संस्कृत , सैन्य विज्ञान , विद्यालय – श्री शिवा डिग्री कालेज तेरहीं कप्तानगंज , आजमगढ़ , (पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर ) उत्तर प्रदेश।

बी.एड — सन् — 1991 , पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर , उत्तर प्रदेश (भारत)
साहित्य रत्न ( परास्नातक संस्कृत ) , हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद , उत्तर प्रदेश

पेशा- अध्यापन , पद – सहायक अध्यापक
रुचि – आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ , हिन्दी साहित्य , हिन्दी काव्य रचना , हिन्दी निबन्ध लेखन , गायन कला इत्यादि ।
अबतक रचित खण्ड काव्य– ” प्रेम कलश ” और ” जय बजरंगबली “।

अबतक रचित रचनाएँ – ” भारत देश के रीति रिवाज , ” बचपन की यादें ” , “पिता ” , ” निशा सुन्दरी ” , ” मन में मधुमास आ गया (गीत) ” , ” भ्रमर और पुष्प ” , ” काल चक्र ” , ” व्यथा भारत की ” इत्यादि ।

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