हिंदी प्याला भ्रमर और पुष्प | Kavita Bhramar Aur Pushpa

प्रस्तुत हिंदी प्याला भ्रमर और पुष्प में भँवरे और फूल के प्रथम प्रेमालाप के दृश्य का चित्रण किया गया है।

हिंदी प्याला भ्रमर और पुष्प

हिंदी प्याला भ्रमर और पुष्प

उड़ रहा भ्रमर था आसमान में,
मद मस्त मगन सा होकर।
अनजानी थी राह मगर,
उम्मीद भरा उत्सुकता के पथ पर।।1।

सहसा दृष्टि गई उपवन पर,
शोभायमान था जो फूलों से।
आ रही मधुर आवाज वहाँ पर,
सरवर के राजित कूलो से।।2।।

गतिमान गगन से नीचे होकर,
उपवन समीप वह जा पहुँचा।
कातर दृष्टि लिये नयनों में,
जिज्ञासु बना वह आ पहुँचा।।3।।

रस भरा सुगन्धित सुमन कोश में,
उसका मैं संज्ञान करूँ।
आदेश तुम्हारा हो मुझको,
तो जी भर उसका पान करूँ।।4।।

काला और कलूटा हूँ प्रेयसि,
पर तुम्हें चाहने वाला हूँ।
अहसास मधुर करके सोचो,
मैं प्रेमी क्या मतवाला हूँ।।5।।

मैं मधुकर तुम सुमन सखी सी,
जन्मों का हममें नाता है।
मुस्कान तुम्हारी पंखुड़ियों की,
अन्तःस्थल तक भाता है।।6।।

मैं सुमन आपकी हूँ प्यारे,
हो गई प्रीति है तुझसे।
बोलो खुलकर बोलो मिलिंद,
अब क्या चाहत है मुझसे।।7।।

मकरन्द महकता मकरन्द कोश का,
मुझको तरसाता है।
मँड़रा रहा तुम्हारे उपर,
जी मेरा ललचाता है।। 8।।

हे सुमन पुहुप हे कुसुम पुष्प ,
तुममें कितना श्रृंगार भरा।
प्रचन्ड प्रेम की ज्वाला तुममें,
प्रेम अग्नि अंगार भरा।।9।।

आकर्षक रंगों में सजती,
रूप निराला है तेरा।
पूर्ण समर्पण देख लिया अब ,
हूँ एकमात्र चाही तेरा।।10।।

मैं इतराता कालेपन पर,
तुम मकरन्द लिये रहती हो।
धूप छाँव भी सहती रहती,
रंग बिरंगी सजती हो।।11।।

जब होगा सूर्यास्त धरा पर,
पंखुड़ियों में भर सो जाना।
होते ही ऊषाकाल जगत में ,
प्रेयसि मुझको बाहर लाना ।।12।

हैं स्वीकार तुम्हारी बात सभी,
पर पल पल साथ निभाना तुम।
प्रीति हमारी अमर रहेगी,
गीत प्रीति के गाना तुम।।13।।

पढ़िए :- फूल की अभिलाषा कविता


रचनाकार का परिचय

रूद्र नाथ चौबे ("रूद्र")नाम – रूद्र नाथ चौबे (“रूद्र”)
पिता- स्वर्गीय राम नयन चौबे
जन्म परिचय – 04-02-1964

जन्म स्थान— ग्राम – ददरा , पोस्ट- टीकपुर, ब्लॉक- तहबरपुर, तहसील- निजामाबाद , जनपद-आजमगढ़ , उत्तर प्रदेश (भारत) ।

शिक्षा – हाईस्कूल सन्-1981 , विषय – विज्ञान वर्ग , विद्यालय- राष्ट्रीय इंटर कालेज तहबरपुर , जनपद- आजमगढ़ ।
इंटर मीडिएट सन्- 1983 , विषय- विज्ञान वर्ग , विद्यालय – राष्ट्रीय इंटर कालेज तहबर पुर , जनपद- आजमगढ़।
स्नातक– सन् 1986 , विषय – अंग्रेजी , संस्कृत , सैन्य विज्ञान , विद्यालय – श्री शिवा डिग्री कालेज तेरहीं कप्तानगंज , आजमगढ़ , (पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर ) उत्तर प्रदेश।

बी.एड — सन् — 1991 , पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर , उत्तर प्रदेश (भारत)
साहित्य रत्न ( परास्नातक संस्कृत ) , हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद , उत्तर प्रदेश

पेशा- अध्यापन , पद – सहायक अध्यापक
रुचि – आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ , हिन्दी साहित्य , हिन्दी काव्य रचना , हिन्दी निबन्ध लेखन , गायन कला इत्यादि ।
अबतक रचित खण्ड काव्य– ” प्रेम कलश ” और ” जय बजरंगबली “।

अबतक रचित रचनाएँ – ” भारत देश के रीति रिवाज , ” बचपन की यादें ” , “पिता ” , ” निशा सुन्दरी ” , ” मन में मधुमास आ गया (गीत) ” , ” भ्रमर और पुष्प ” , ” काल चक्र ” , ” व्यथा भारत की ” इत्यादि ।

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